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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार ने नहीं खोला राफेल का राज, क्या कोर्ट होगा सख्त?


बुधवार को देश की सर्वोच्च अदालत ने देश में बवाल का विषय बना हुआ राफेल मुद्दे को उजागार करने के आदेश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि वो 10 दिन के भितर राफेल की कीमत और इसके फायदे एक सील बंद लिफाफे में कोर्ट को दें। लेकिन सुबह आए सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर शाम होते-होते सरकार का भी रुख साफ हो गया और सरकार के एक उच्च सूत्र के हवाले से खबर मिली कि सरकार ने इस बारे में जानकारी देने को लेकर अपनी असमर्थता जताई है और तत्काल इस पर अपना एक हलफनामा भी दायर कर दिया है।

हलफनामा दायर करते हुए सरकार ने राफेल की डील को उजागर ना करने के पीछे इसकी अत्यंत गोपनीयता बताई। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुआई वाली बेंच से कहा कि यहां तक संसद को भी राफेल लड़ाकू विमान की कीमत के बारे में नहीं पता है।

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिकाकर्ता का कहना है कि केंद्र सरकार को राफेल विमान की कीमत के बारे में सर्वोच्च न्यायालय को सील बंद लिफाफे में बताने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। देश की सर्वोच्च अदालत को इस जानकारी देने में क्या हर्ज? क्योंकि संसद को पहले से ही इसके बारे में पता है। केंद्र ने संसद को जो बताया है वह राफेल का बेसिक फ्रेम है ना कि राफेल विमान की मेड टू ऑर्डर कीमत। जिसका समझौता भारत और फ्रांस के बीच हुआ है।

सरकार की तरफ से सामने आए अटॉर्नी जनरल से बेंच ने कहा है कि यदि यह इसका विवरण इतना विशेष मानते है जो की इसे न्यायालय के साथ भी साझा नहीं किया जा सकता है तो केंद्र सरकार को ऐसा कहते हुए हलफनामा दाखिल करना चाहिए।


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