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जानिए धनतेरस पर क्यों और कैसे जलाया जाता ‘यम’ का दीपक


धनतेरस से दीपावली का पर्व शुरू हो जाता है। इस दिन धन के देवता कुबेर और देवताओं के चिकित्सक धन्वंतरि महाराज की पूजा होती है। धनतेरस पर दीया जलाना क्यों जरूरी होता है और इसे कैसे जलाया जाता है ये जानना जरूरी है।

धनतेरस की सबसे बड़ी मान्यता यह है कि इस दिन की गई पूजा से व्यक्ति यम के द्वारा दी जानें वाली यातनाओं से मुक्त हो जाता है। हिन्दू धर्म में धनतेरस यश और वैभव,कीर्ति सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। धनतेरस की शाम को दीया दान किया जाता है और माना जाता है कि ऐसा करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और इससे व्यक्ति की अकाल मृत्यु नहीं होती हैं। लेकिन इस दिन दीया जलाने का तरीका आम दिनों से अलग होता है। तो आइए जाने इसे जलाने के तरीके।

यम का दीया कैसे जलाये:

वैसे तो धनतेरस की शाम को मुख्य द्वार पर 13 और घर के अंदर भी 13 दीये जलाने होते हैं। ये काम सूरज डूबने के बाद किया जाता है। लेकिन यम का दीया परिवार के सभी सदस्यों के घर आने और खाने-पीने के बाद सोते समय जलाया जाता है। इस दीये को जलाने के लिए पुराने दीपक का इस्‍तेमाल करें। उसमें सरसों का तेल डालें और रुई की बत्ती बनाएं। घर से दीया जलाकर लाएं और घर के बाहर उसे दक्षिण की ओर मुख कर नाली या कूड़े के ढेर के पास रख दें। साथ में जल भी चढ़ाएं और बिना उस दीये को देखे घर आ जाएं।

धनतेरस के दिन ऐसे करें पूजा:

धनतेरस का दीपदान घर की लक्ष्मी को करना चाहिए। इस दिन किसी भी धातु के बर्तन खरीदें और उसमें मिठाई भर कर ही घर मे प्रवेश करें और धनवंतरी, कुबेर और लक्ष्मी गणेश को भोग लगाएं।

इससे घर के लोग रोग, विपदाओं और द्ररिद्रता से दूर रहते हैं। ऐसी मान्यता है कि सोने-चांदी या पीतल के बर्तन खरीदने से घर में सौभाग्य, सुख-शांति और स्वास्थ्य का वास होता है। पीतल भगवान धन्वंतरी का धातु है। इसलिए पीले रंग के धातु इस दिन खरीदना शुभ होता है।


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