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जानिए पितृ पक्ष से जुड़ी सारी बातें एक क्लिक में


पितृ पक्ष को लेकर हमेशा कई सवाल हमारे जहन में रहते हैं। कभी पितृ पक्ष के तरीके को लेकर हम परेशान रहते हैं तो कभी पितृ पक्ष के पिछे की कहानी जानने का कौतुहल रहता है।

25 सितम्बर मंगलवार को भाद्रपाद पूर्णिमा का पहला श्राद्ध है। अगर आप भी अपनी कुंडली के पितृ दोष से परेशान हैं तो घबराए नहीं इस बार के पितृ पक्ष के दौरान आप अपने सारे दोषों से मुक्त हो सकते हैं। पितृ पक्ष की कहानी अगर आपको बताएं तो इस कहानी अध्यात्म से जुड़ी हुई है। दरअसल मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान हमारे पितर की आत्माएं हमारे साथ रहती है। उनकी आत्मा की शांति के लिए हमें श्राद्ध करना होता है।

Pitru Paksha

खुशहाल जीवन की चाह किसे नहीं होती लेकिन पितर अगर नाराज हो जाएं तो आपकी खुशियों को गृहण लग जाता है मसलन घर में आशांति फैल जाती है। ऐसे में पितरों को तृप्त करना और उनकी आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में श्राद्ध करना जरूरी माना जाता है। श्राद्ध के जरे पितरों की तृप्ति के लिए भोजन पहुंचाया जाता है और पिंड दान व तर्पण कर उनकी आत्मा की शांति की कामना की जाती है।

शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष का महत्व

Pitru Pakshaशास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। मान्यता है कि अगर श्राद्ध न किया जाए तो मरने वाले व्यक्ति की आत्मा को मुक्ति नहीं मिल सकती है। वहीं कहा यह भी जाता है कि श्राद्ध करने से पितृ खुश हो जाते हैं और हमें खुशहाली का आशिर्वाद देते हैं। पितृ पक्ष को शास्त्रों की नजर से देखें तो यह ऐसा वक्त होता है जब यमराज पितरों को अपने परिजनों से मिलने के लिए मुक्त करते हैं। यदि इस समय हम उनका ख्याल नहीं रखते हैं तो उनकी आत्मा दुखी होकर वापस चली जाती है। इसका खामियाजा हमें अगामी जीवन में झेलना पड़ता है।

पितृ पक्ष पर क्या कहता है हिंदू कैलेंडर ?

अश्र्विन मास के कृष्ण पक्ष में पितृ पक्ष पड़ते हैं। पितृ पक्ष की शुरुआत पूर्णिमा तिथि से शुरू होकर अमावस्ता तक होती है। पितृ पक्ष का कुल समय 16 दिनों का होता है लेकिन इस साल एक दिन कम हो गया है मसलन इस साल 15 दिनों का पितृ पक्ष होगा। 24 सितंबर से शुरू होकर 8 अक्टूबर तक आप श्राद्ध कर सकते हैं।

जानिए किस दिन श्राद्ध करने से पितर सबसे अधिक खुश होते हैं ?

दिवंगत परिजन की मृत्यु की तिथि में ही श्राद्ध किया जाता है। इसका मतलब मृत्यु प्रतिपदा के दिन हुई है तो प्रतिपदा के दिन ही श्राद्ध करना चाहिए। चलिए अब आपको बताते हैं कि आमतौर पर पितृ पक्ष में तिथि का चयन किस आधार पर होता है।

  • जिन परिजनों की अकाल मृत्‍यु या किसी दुर्घटना या आत्‍महत्‍या का मामला हो तो श्राद्ध चतुर्दशी के दिन किया जाता है।
  • दिवंगत पिता का श्राद्ध अष्‍टमी के दिन और मां का श्राद्ध नवमी के दिन किया जाता है।
  • जिन पितरों के मरने की तिथि याद न हो या पता न हो तो अमावस्‍या के दिन श्राद्ध करना चाहिए।
  • अगर कोई महिल सुहागिन मृत्‍यु को प्राप्‍त हुई हो तो उसका श्राद्ध नवमी को करना चाहिए।
  •  संन्‍यासी का श्राद्ध द्वादशी को किया जाता है।

श्राद्ध करने के अहम नियम

Pitru paksha

  • पितृपक्ष में हर दिन तर्पण करना चाहिए. पानी में दूध, जौ, चावल और गंगाजल डालकर तर्पण किया जाता है।
  • इस दौरान पिंड दान करना चाहिए. श्राद्ध कर्म में पके हुए चावल, दूध और तिल को मिलकर पिंड बनाए जाते हैं। पिंड को शरीर का प्रतीक माना जाता है।
  • इस दौरान कोई भी शुभ कार्य, विशेष पूजा-पाठ और अनुष्‍ठान नहीं करना चाहिए. हालांकि देवताओं की नित्‍य पूजा को बंद नहीं करना चाहिए।
  • श्राद्ध के दौरान पान खाने, तेल लगाने और संभोग की मनाही है।
  • इस दौरान रंगीन फूलों का इस्‍तेमाल भी वर्जित है।
  • पितृ पक्ष में चना, मसूर, बैंगन, हींग, शलजम, मांस, लहसुन, प्‍याज और काला नमक भी नहीं खाया जाता है।
  • इस दौरान कई लोग नए वस्‍त्र, नया भवन, गहने या अन्‍य कीमती सामान नहीं खरीदते हैं।

श्राद्ध कैसे करें?

  • श्राद्ध करने के लिए आप किसी विद्वान पुरोहित को बुला सकते हैं।
  • श्राद्ध के दिन अपनी सामर्थ्‍य के अनुसार अच्‍छा खाना बनाएं।
  • खासतौर से आप जिस व्‍यक्ति का श्राद्ध कर रहे हैं उसकी पसंद के मुताबिक खाना बनाएं।
  • खाने में लहसुन-प्‍याज का इस्‍तेमाल न करें।
  • मान्‍यता है कि श्राद्ध के दिन स्‍मरण करने से पितर घर आते हैं और भोजन पाकर तृप्‍त हो जाते हैं।
  • इस दौरान पंचबलि भी दी जाती है।
  • शास्‍त्रों में पांच तरह की बलि बताई गई हैं: गौ (गाय) बलि, श्वान (कुत्ता) बलि, काक (कौवा) बलि, देवादि बलि, पिपीलिका (चींटी)।
  • यहां पर बलि का मतलब किसी पशु या जीव की हत्‍या से नहीं बल्‍कि श्राद्ध के दौरान इन सभी को खाना खिलाया जाता है।
  • ब्राह्मण भोज के बाद पितरों को धन्‍यवाद दें और जाने-अनजाने हुई भूल के लिए माफी मांगे।
  • इसके बाद अपने पूरे परिवार के साथ बैठकर भोजन करें।

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