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Mitron Movie Review: ‘मित्रों’ की जबरदस्ती हंसाने की कोशिश, लेकिन प्यार और बेरोजगारी का मजेदार तालमेल


फिल्म 'मित्रों' की कहानी है 2 युवाओं की जिसमें से एक है 'जय', जो इंजीनियर की पढ़ाई कर चुका है मगर बेरोजगार है और उसके पिता उसकी शादी कर देना चाहते हैं ताकि जिम्मेदारी आने से शायद वो कुछ करने लगे

नई दिल्ली: फिल्म ‘मित्रों’ की कहानी है 2 युवाओं की जिसमें से एक है ‘जय’, जो इंजीनियर की पढ़ाई कर चुका है मगर बेरोजगार है और उसके पिता उसकी शादी कर देना चाहते हैं ताकि जिम्मेदारी आने से शायद वो कुछ करने लगे. दूसरी है ‘अवनी’, जो ऑस्ट्रेलिया जाकर पढ़ाई करना चाहती है मगर उसके पिता भी उसकी शादी करके उसका घर बसाना चाहते हैं और ये कहानी गुजरात में बसी है. शादी के लिए लड़की देखने एक गलत घर मे चले जाते हैं जहां ‘जय’ और ‘अवनी’ की मुलाकात होती है. फिल्म में जय की भूमिका निभा रहे हैं जैकी भगनानी और अवनी के किरदार में हैं मशहूर एक्ट्रेस कृतिका कमरा जिनकी ये पहली फिल्म है.
‘मित्रों’ एक हल्की-फुल्की फिल्म है, जिसमें आज के युवाओं की तकलीफ और परेशानी को खूबसूरती से हंसी मजाक के अंदाज में दिखाया गया है. इसके डायरेक्टर नितिन कक्कड़ है और उन्होंने फिल्म का ट्रीटमेंट अच्छा किया है. कई दृश्यों में फ्लैशबैक को अच्छे से इस्तेमाल किया गया है.
फिल्म मित्रों का पहला भाग अच्छा है मगर दूसरा भाग कहीं-कहीं धीमा लगता है और कुछ दृश्य ऐसे हैं जहां लगता है कि जबरदस्ती हंसाने की कोशिश की जा रही है. इस फिल्म से आजके युवा अपने आपको रिलेट कर सकते हैं. फिल्म मित्रों को आप एक बार देख सकते हैं क्योंकि ये कहानी आजकी है और मुझे लगता है कि आपको शायद ये फिल्म निराश नहीं करेगी. ‘मित्रों’ के लिए मेरी रेटिंग है 3 स्टार्स.

स्क्रिप्ट में कसाव है और पटकथा अच्छी है. सबसे अच्छी बात यह है कि कहानी को प्यार और बेरोजगारी में जबरदस्ती खींचा नहीं है. फिल्म झट से निकल जाती है. बेरोजगार युवा के रोल को जैकी ने बेहतरीन तरीके से निभाया है. कृतिका के किरदार में काफी मासूमियत दिखती है.


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