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“स्टैच्यू ऑफ यूनिटी”: कैसे बने सबसे बड़े सरदार, कितने की टिकट और क्या है खास? जानें


पीएम मोदी ने कहा कि 'सरदार की प्रतिमा को समर्पित करने का अवसर सौभाग्य की बात है। जब मैंने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर इसकी कल्पना की थी, तो अहसास नहीं था कि एक दिन प्रधानमंत्री के तौर पर मुझे ही यह पुण्य काम करने का मौका मिलेगा

देश विदेश में चर्चा का विषय बनी हुई विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” का आज उद्घाटन किया गया है। ये प्रतिमा देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की है जो की देश को उनकी 143वीं जयंती के मौके पर मिली है। पीएम मोदी ने गुजरात के नर्मदा जिले स्थित केवडिया में विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा का उद्घाटन किया।

“स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है जिसका देश द्वारा सरदार पटेल को समर्पित किया गया है। पीएम मोदी ने सबसे ऊंची प्रतिमा का उद्घाटन किया। उद्घाटन करने के बाद जब पीएम मोदी लोगों की बीच पहुंचे तो सबसे पहले उन्होंने “सरदार पटेल अमर रहे” के नारे लगाए। पीएम मोदी ने कहा कि आज पूरा देश राष्ट्रीय एकता दिवस मना रहा है। देश की एकता और अखंडता के लिए युवा दौड़ रहे हैं। मैं उनके इस जज्बे को मैं नमन करता हूं।

पीएम मोदी ने कहा कि ‘सरदार की प्रतिमा को समर्पित करने का अवसर सौभाग्य की बात है। जब मैंने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर इसकी कल्पना की थी, तो अहसास नहीं था कि एक दिन प्रधानमंत्री के तौर पर मुझे ही यह पुण्य काम करने का मौका मिलेगा। सरदार साहब के इस आशीर्वाद के लिए मैं खुद को धन्य मानता हूं।’

“स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” कोई आम प्रतिमा नहीं है। इसे भारत समेत अमेरिका और चाइना के मजदूरों का भी साथ मिला है। इस 182 मीटर ऊंची प्रतिमा को बनाने में हजारों मजदूर व सैकड़ों इंजीनियर महीनों तक जुटे रहे। इसमें सबसे ज्यादा विचार विमर्श सरदार के चेहरे को लेकर हुआ तो और उनकी भावभंगिमा कैसी हो इसे तय करने में काफी समय लगा।

पीएम मोदी ने ‘टेंट सिटी’ से भी परदा हटाया। इसे कच्छ की तर्ज पर तैयार किया गया और इसे टेंट सिटी बनाया गया है जिसमें 250 टेंट हाउस हैं। लेकिन सारी बात ये की इस प्रतिमा को कैसे बनाया गया और इसमें क्या है खास?

कैसे बनी और क्या है खास:

-करीब 44 माह के रिकार्ड समय में बन कर तैयार हुई इस प्रतिमा पर करीब 2332 करोड़ रुपये का खर्च आया है।

-इस प्रतिमा के निर्माण में 70,000 टन सीमेंट, 22,500 टन स्टील व 1,700 मीट्रिक टन तांबा लगा है।

-ये प्रतिमा भूकंप को सहन करने की क्षमता रखती है, जो 6.5 तीव्रता के भूकंप को सहन कर सकती है और 220 किमी प्रति घंटा की तेज हवा का सामना कर सकती है।

-इस प्रतिमा में 85 फीसद तांबा का उपयोग किया गया है, जिससे इसमें जंग नहीं लग सकता।

-जानकारी देदे की अमेरिका की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण में पांच साल लगे थे औऱ चीन में बुद्ध की प्रतिमा के निर्माण में करीब 90 साल लगे थे।

-प्रतिमा के पास ही 17 किमी लंबी वैली ऑफ फ्लावर तैयार की गई है। यहां दुनिया के विविध फूलों की किस्म के साथ नमो फूल भी देखे जा सकेंगे।

-250 एकड़ में बने इस वैली ऑफ फ्लावर में 100 से ज्यादा तरह के पौधे लगाए गए हैं

-पर्यटकों के लिए एक टेंट सिटी और सरदार पटेल को समर्पित एक म्यूजियम भी बनाया गया है।

-कच्छ की तर्ज पर बने इस टेंट सिटी में 250 टेंट हाउस हैं, तकरीबन 500 लोगों के रूकने की व्यवस्था है। यहां गुजराती और आदिवासी खाने से लेकर नृत्य का लुफ्त भी पर्यटक उठा सकेंगे।

-55 मंजिला (करीब 600 फीट) प्रतिमा के हृदयस्थल 153 मीटर की ऊंचाई तक लोग लिफ्ट से पहुंचकर वहां से 138 मीटर ऊंचे सरदार सरोवर बांध को देख सकेंगे।

-स्पेशल युवाओं के लिए यहां सेल्फी पॉइंट बनाए गए हैं।

आपको बता दें की सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट जल्द ही एक एप भी जारी करेगी, जिसके माध्यम से लोगों को टिकट बुक करने में आसानी होगी।

कितने की है टिकट?

1. अगर इस प्रतिमा का पूरा लुफ्त उठाना चाहते है जिसमें गैलरी, म्यूजियम और वैली ऑफ फ्लॉवर शुमार हैं। तो आपको इसके लिए 380 रुपये चुकाने होंगे। तीन साल से वयस्क तक टिकट की दर 350 रुपये और बस से सफर के 30 रुपये देने होंगे।

2. आप गैलरी नहीं देखना चाहते तो तीन से 15 साल के बच्चों के लिए 60 रुपये, जबकि 15 साल से ऊपर के लोगों के लिए 120 रुपये का टिकट लेना होगा। इसके लिए भी 30 रुपये बस के अलग देने होंगे।

3. एक तीसरे प्रकार का टिकट 120 रुपये का है। इसमें प्रतिमा के पास तक जा सकते हैं, पर ऊपर नहीं जा पाएंगे।

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