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जब चंदौली पुलिस बनी भगवान


यूपी पुलिस का नाम जेहन में आते हैं मन में तरह-तरह के ख्याल आने लगते हैं तो कभी क्रूर यूपी पुलिस, कभी अन्याय करती यूपी पुलिस तो कभी गरीबों को सताने वाली यूपी पुलिस खुलेआम रिस्वत लेती यूपी पुलिस, लेकिन यूपी पुलिस में कुछ ऐसे भी चेहरे हैं जिनके सराहनीय कार्य से यूपी पुलिस कि दिल में इज्जत बढ़ जाती है और लोग दुआएं देने में मजबूर हो जाते हैं ।

ऐसा ही यूपी पुलिस में एक अधिकारी चंदौली जिले में सीओ के पद पर तैनात है जिन्होंने परिवार की खुशियों को उजड़ने से बचाया साथ ही अपने वेतन से दोनों परिवार की बच्चियों का इलाज भी करवाया, मामला 2 सितंबर जन्माष्टमी की रात के है जब एक बाइक की टक्कर से दो बच्चियां मरणासन्न स्थिति में पहुंच गई थी, सूचना पाकर मौके पर पहुंचे सकलडीहा सीओ ने ना सिर्फ बच्चियों को जिला अस्पताल पहुंचाया बल्कि हालत गंभीर होते देख उन्हें वाराणसी ट्रामा सेंटर तक भर्ती कराया,  आज पूरा परिवार पुलिस अधिकारी को इस काम के लिए धन्यवाद दे रहा है और उनकी लंबी उम्र की कामना भी कर रहा है, ये वही सकलडीहा सीओ है जिन्होंने पूर्वांचल के सबसे भ्रष्ट ARTO आर इस यादव के सिंडिकेट का खुलासा कर जेल भेजा वही यूपी बोर्ड की परीक्षा के दौरान अकेले अपने दम पर पूर्वांचल में सबसे बड़े नकल सिंडिकेट का भंडाफोड़ कर नकल माफियायो की कमर तोड़ कर रख दिया था।

 

 

बच्चियों के साथ ऐसा क्या हुआ था की इनको बीस दिन ट्रामा सेंटर में रहना पड़ा था

 

दरअसल बीते 2 सितंबर जन्माष्टमी के दिन सकलडीहा कोतवाली क्षेत्र के नरैना गांव में देर शाम दो बच्चियां 5 वर्षीय अंजना और 6 वर्षीय अंतिमा सड़क के जरिए दुकान पर जा रही थी कि अचानक एक अनियंत्रित बाइक ने दोनों को जोरदार टक्कर मार दिया और दोनों गंभीर अवस्था में अचेत हो गई,  घटना की सूचना मिलते ही मौके पर सकलडीहा कोतवाली सहित सकलडीहा सीओ त्रिपुरारी पांडे पहुंचे, दोनों बच्चियों की स्थिति देख परिजन रोने चिल्लाने लगे, परिजनो की हालात को देखकर  तत्काल सीओ सकलडीहा त्रिपुरारी पांडेय दोनों बच्चियों को अपनी गाडी से लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद दोनों बच्चियों की हालत गंभीर देख उन्हें तत्काल वाराणसी के ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया,  ट्रामा सेंटर में भर्ती होने के बाद दोनों बच्चियों का इलाज शुरू हुआ लेकिन बच्चियों के मां-बाप की स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी की वो बच्चियों इलाज का खर्च वहन कर पाए, मामले की जानकारी मलते ही तत्काल सीओ सकलडीहा ने एक सिपाही के जरिए अपना एटीएम बच्चियों के परिजनों के पास भेजा और उन्हें आश्वस्त किया की जितने भी पैसे की जरूरत हो इस एटीएम के जरिए निकालकर बच्चों का समुचित इलाज कराये।

 

वेतन से पूरा खर्च दिया बच्चियों के इलाज पर

 

आपको जानकर हैरानी होगी की बच्चियों के इलाज पर एक लाख बारह हजार रूपये खर्च हुए और सीओ सकलडीहा ने अपने वेतन से पूरा खर्च वहां किया, 20 दिन बाद दोनों बच्चियां वाराणसी बीएचयू ट्रामा सेंटर से डिस्चार्ज हुई और अपने घर लौटी, अंजना और अंतिमा के परिजन सीओ साहब के इस सहयोग के कारण अपनी बच्चियों को पाकर जहां फूले नहीं समा रहे हैं वही सीओ साहब का धन्यवाद करते हुए नहीं थक रहे हैं।यहां तक कि उनकी आंखों में आंसू तक आ जा रहे हैं। परिजनों का कहना है की सीओ साहब नहीं होते तो हमारी बच्चियां आज नहीं बच पाती और दोबारा हमारे घर में खुशियां नहीं लौट पाती, हम इतने गरीब हैं कि हम इतना महंगा इलाज का खर्च नहीं उठा सकते थे।


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