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धनतेरस पर सोने और चांदी की वस्तुएं खरीदना क्यों होता है जरूरी


दिवाली पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। धनतेरस के दिन धन और आरोग्य के लिए भगवान धनवंतरी धन के देवता कुबेर की पूजा भी की जाती है। धनतेरस पर खरीदारी करने की परंपरा और मान्यता दोनों हैं।

दिवाली पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। धनतेरस के दिन धन और आरोग्य के लिए भगवान धनवंतरी धन के देवता कुबेर की पूजा भी की जाती है। धनतेरस पर खरीदारी करने की परंपरा और मान्यता दोनों हैं। सदियों से ये रीत चली आ रही है। देवी लक्ष्मी की तरह ही भगवान धनवंतरि भी सागर मंथन से उत्पन्न हुए हैं। कहा जाता है कि धनवंतरि जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथ में अमृत से भरा कलश था। इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है।

धनतेरस के दिन सोने और चांदी के बर्तन, सिक्के और आभूषण खरीदने की परम्परा रही है। यह भी कहा जाता है कि इस दिन धन (वस्तु) खरीदने से उसमें 13 गुणा वृद्धि होती है। लोग इस दिन ही दीवाली की रात पूजा करने के लिए लक्ष्मी व गणेश जी की मूर्ति भी खरीदते हैं।

धनतेरस के दिन यह मान्यता है कि समुंद्र मंथन के दौरान इसी दिन भगवान धनवंतरी अपने साथ अमृत कलश और आयुर्वेद लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इन्हें औषधि का जनक माना जाता है और इस दिन गहनों व बर्तनों खरीददारी करना बेहद शुभ होता है।