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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राफेल पर केंद्र सरकार का यू-टर्न

शुक्रवार 14 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील मामले पर अपना फैसला सुनाया था जिसमें कहा गया था कि फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा हुआ है उसमें किसी प्रकार का कोई संदेह नजर नहीं आ रहा है और इस डील में सभी जरुरी प्रक्रियाओं को पूरा किया गया है. केंद्र सरकार ने कहा था पीएसी ने सीएजी की रिपोर्ट देखी है लेकिन अब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दायर कर कहा है कि पहले की एफिडेविट में टाइपिंग गलती की वजह से ऐसा हुआ था. केंद्र सरकार ने कहा पीएसी ने अभी तक सीएजी की रिपोर्ट नहीं देखी है.






सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियों ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार ने कोर्ट को गुमराह किया है. राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि जिस दिन राफेल डील का मामले की जांच होगी तो दो लोगों के नाम सामने आएंगे एक नरेंद्र मोदी और दूसरे अनिल अंबानी. कांग्रेस अध्यक्ष ने ये भी कहा था कि केंद्र सरकार ने एक प्राइवेट फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए राफेल डील पर भ्रष्टाचार किया है.

हालांकि देश के शिर्ष न्यायालय सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील के मामले पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि इसमें किसी प्रकार का कोई भष्टाचार नहीं है और रिपोर्ट को देखकर ऐसा लग रहा है कि इसमें किसी भी प्राइवेट फर्म को फायदा पहुंचाया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि राफेल जैसे लड़ाकू विमानों की जरुरत भारतीय वायुसेना को है जिससे हमारी सेना और भी ज्यादा सशक्त हो सके.

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