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किस वजह से 1990 में मुलायम सिंह यादव ने गोली चलवाई ?

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अयोध्या में राम मंदिर के विवाद से हर कोई वाकिफ है । जिस तरह से यह मामला भक्ति और आस्था से जुड़ा है लेकिन चुनाव के जीतने की होड़ में यह मुद्दा अब राजनीतिक बनता जा रहा है । आज 6 दिसंबर है इसी दिन 1992 में बाबरी मस्जिद को गिराया गया था जिसकी सुनवाई आज तक चल रही है ।

चलिए बात करते हैं आयोध्या विवाद कि, 1992 के बाद की कहानी सबको पता है, लेकिन 1949 से लेकर अब तक ऐसा काफी कुछ हुआ है जो आपको जानना चाहिए । दरअसल 1989 के चुनावों की बात की जाए तो राम मंदिर आंदोलन के बहाने 2 सीट से 85 सीट पर पहुंचने वाली बीजेपी और उसके तत्कालीन अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी इस मुद्दे को किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहते थे । 1989 में जनता दल की सरकार भले ही बीजेपी के सहयोग से बनी, लेकिन पार्टी के 2 बड़े नेता और उत्तर प्रदेश और बिहार की कमान संभाल रहे मुलायम सिंह यादव और लालू प्रसाद यादव बीजेपी की इस चाल से परेशान थे ।

1990 की बात की जाए तो अयोध्या में विवादित स्थल का ढांचा बचाए रखने के लिए कारसेवकों पर गोली चला दी गई । कारसेवा समिति के अध्यक्ष जगदगुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती बताते हैं कि 30 अक्टूबर 1990 को लाखों की तादाद में कारसेवकों की भीड़ उमड़ी थी । हालांकि, तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के विवादित स्थल पर ‘पंरिदा भी पर नहीं मार सकेगा’ के बयान के बाद लोगों को अनुमान हो गया था कि हालात ठीक नहीं हैं, लेकिन तब तक अयोध्या में इतनी भीड़ जमा हो चुकी थी कि उन्हें काबू में नहीं किया जा सकता था । निश्चित समय पर कारसेवा शुरू हो गई और कारसेवकों ने विवादित स्थल पर ध्वज लगा दिया और उसके बाद पुलिस फायरिंग में कई लोग मारे गए । जिसके बाद कारसेवा रद्द कर दी गई ।

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