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सपा-बसपा गठबंधन की काट के लिए बीजेपी का ‘मास्टरप्लान’

सपा-बसपा गठबंधन की काट के लिए बीजेपी का ‘मास्टरप्लान’

भारतीय जनता पार्टी ने साल 2014 के चुनाव में उत्तर प्रदेश में बेहतरीन प्रदर्शन कर 80 लोकसभा सीटों में 72 सीट जीतकर सभी को चौंका दिया था। इसके बाद यूपी विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिला और योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया गया। अब ऐसे में उत्तर प्रदेश में काफी ज्यादा मजबूत माने जाने वाली पार्टियां सपा और बसपा काफी ज्यादा कमजोर हो गई थी और 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मात देने के लिए दोनों पार्टियों ने गठबंधन कर लिया है।






12 जनवरी को गठबंधन का ऐलान करने के साथ ही मायावती ने अखिलेश यादव के साथ पहली बार एकसाथ आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी को चौंका दिया। अब ऐसे में बीजेपी इस गठबंधन की काट में कुछ ऐसा करने वाली है जिससे चुनाव परिणाम में पार्टी को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं उठाना पड़े। दरअसल बीजेपी की कोशिश होगी कि वो किसी तरह से गठबंधन का जो तुरुप का इक्का है जातिय आधार उसपर किसी प्रकार से घुसपैठ कर गठबंधन को करप्ट और अवसरवादी साबित किया जाए।

बीजेपी की कोशिश है कि यूपी में किसी तरह से दलित और पिछड़ों को पार्टी से जोड़ा जाए। इस रणनीति के तहत पार्टी ने पिछले कई महीनों में उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की अगुवाई में यादवों समेत कई जातियों के साथ बैठक कर उसे बीजेपी में जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही पार्टी के कार्यकर्ता दलितों के साथ भी बैठक कर रहे हैं और चुनाव से पहले जमीन तैयार करने की पूरी कोशिश में जुटे हुए हैं।

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