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जानिए क्यों गठबंधन में अखिलेश से अधिक होगी मायावती की अहमियत

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों को बसपा और मायावती के लिए शुभ संकेत माना जा सकता है। तीन हिंदी भाषी राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीएसपी के बेहतरीन प्रदर्शन के बाद अब लोकसभा चुनाव के लिए होने वाले गठबंधन में सीटों की दावेदारी में बसपा की समाजवादी पार्टी से कहीं अधिक अहमित हो सकती है।



मायावती हमेशा से कहती आई हैं कि सम्मानजनक सीटें मिलने की स्थिति पर ही समझौता करेंगी। वह एक नहीं कई बार ऐसा बयान दे चुकी हैं। लालू की अगस्त 2017 की रैली हो या ममता बनर्जी की रैली। वह इन दोनों रैलियों में यह कहकर नहीं गई कि गठबंधन से पहले स्थिति साफ होनी चाहिए। हाल ही में जब दिल्ली में विपक्षी दलों की बैठक हुई तो न तो वह गईं और न ही उनकी पार्टी से कोई प्रतिनिधि ही वहां गया।




मायावती की कार्यशैली से सभी परिचित हैं। वह अपनी शर्तों पर काम करती हैं। चाहे सपा-बसपा गठबंधन की सरकार रही हो या बीजेपी -बसपा गठबंधन की सरकार। मायावती की शर्तों के विपरीत चलने की आदत नहीं है। बसपा अमूमन उपचुनावों में उम्मीदवार नहीं उतारती है इसलिए यूपी में हुए उपचुनावों में उसने सपा का साथ दिया लेकिन लोकसभा चुनाव के लिए जब गठबंधन की बात आई तो यह बात साफ कर दी कि हैसियत के आधार पर ही सीटें बंटेंगी।

एमपी और राजस्थान में बसपा व सपा ने कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन देने की बात की है इससे तो यह साफ होता दिख रहा है कि भविष्य में होने वाले गठबंधन में बसपा, सपा के साथ कांग्रेस भी शामिल हो सकती है।

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