18 जुलाई से मानसून सत्र की शुरुआत, केंद्र सरकार के सामने होगी नई चुनौती

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से शुरु होने जा रहा है । बता दें कि पिछला बजट सत्र हंगामें की भेट चढ़ गया था जिसमें कई मामले लंबित पड़े रहे थे। इस सत्र में भी कई ऐसे विधेयक लंबित पड़े हैं जिन्हे पारित करना अत्यन्त आवश्यक है। बीते सत्र के न चल पाने की वजह से इस सत्र में विधेयकों का बोझ बढ़ना तो तय ही था। लेकिन अब केंद्र सरकार के सामने ये एक बड़ी चुनौती होगी की किस तरह ये सत्र आसानी से पूरा हो और लंबित विधेयकों को पारित करा पाए।
वहीं संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने सत्र की तारीखों के विषय में बताया कि इस सत्र में सबसे महत्वपूर्ण मद्दे जिन पर सरकार जोर देने का प्रयास करेगी वो तीन तलाक और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए राष्ट्रीय आयोग को संवैधानिक दर्जा देने से संबंधित हो सकता है।

6  महत्वपूर्ण अध्यादेश सरकार की प्राथमिकता

भगोड़ा अध्यादेश

नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे भगोड़ों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने अप्रैल में भगोड़े अपराधी अध्यादेश 2018 को मंजूरी दी थी। जिसके बाद राष्ट्रपति की भी सहमति मिल गई थी। इस कानून में प्रावधान है कि अपराध कर देश से भागे गए व्यक्तियों की संपत्ति पर मुकदमे का फैसला आए बिना उसे जब्त करने और बेच कर कर्जा चुकाने का प्रावधान है। लेकिन संसद में और दूसरे मामलों पर सुनवाई के चलते इसे पारित नहीं किया जा सका।

कारोबार से जुड़ा अध्यादेश

व्यवसाय में सरलता के लिए रैंकिग और ज्यादा सुधार करने की कोशिश करने के लिए व्यावसायिक मामलों का जल्द निपटारा करने के लिए मई में कानून में बदलाव करने को लेकर अध्यादेश लायी थी जिसे अभी तक राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली है।

आपराधिक कानून में बदलाव

आये दिन हो रही बलात्कार की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए 12 साल से छोटी बच्चियों से कुकर्म के दोषियों को फांसी की सजा के प्रावधान संबंधी अध्यादेश अभी भी संसद में पारित नहीं हो पाया है। हालांकि इस पर कैबिनेट और राष्ट्रपति अपनी सहमति दे चुके हैं। इस कानून में अध्यादेश 2018 में संशोधन के मुताबिक ऐसे मामलों के निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित की जाएंगी।

होम्योपैथी से संबंधित संशोधन अध्यादेश2018

18 मई को सरकार की तरफ से एक अध्यादेश लाया गया था जिसमें होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल कानून 1973 में संशोधन किया गया है। इस कानून में फिर से काउंसिल का गठन करने का प्रावधान है। अगर ये अध्यादेश नहीं संशोधित हुआ तो जो होम्योपैथी मैडिकल कॉलेज खोले जाएंगे या कोई नये कोर्स शुरु किए जाएंगे तो उन्हें एक साल के अंदर सरकार से परमिशन लेनी होगी। अगर ऐसा नहीं किया जाता तो पास होने वाले विद्यार्धी क्वालीफाइड नहीं माने जाएंगे।

खेल विश्वविद्यालय अध्यादेश 2018

इस अध्यादेश को जून में राष्ट्रपति की सहमति के बाद लागू कर दिया गया था। 23 मई को खेल मंत्रालय की तरफ से एक संसद में एक अध्यादेश लाया गया था जिसके तहत मणिपुर में खेल विश्वविद्यालय का मुख्यालय बनाने के लिए मंजूरी मांगी गई थी। इसका लक्ष्य बच्चों में खेलों के प्रति रूचि बढ़ना है। इसके अलावा खिलाड़ियों के कोचिंग, ट्रेनिंग और अंतर्राष्ट्रीय के लिए तैयार करना है। बता दें कि इसके लिए 2014-15 के बजट में 236 करोड़ का फंड भी प्रस्तावित है।

दिवालिया घोषित संशोधन अध्यादेश 2018

इस अध्यादेश के अनुसार अपनी इच्छा से दिवालिया और अपने अकांउट को एक साल या उससे ज्यादा समय के लिए एनपीए घोषित करने वाले लोगों को किसी तरह से बक्शा न जाने का प्रावधान है। आपको बता दें कि सरकार की तरफ से अध्यादेश के माध्यम से बैंकरप्सी कोड में एक नया संसोधन 29A और 235A तहत जोड़ा गया है।

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