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ये ‘हवन’ है बड़े काम का

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ये 'हवन' है बड़े काम का

हर इंसान ने अपने घर में हवन ज़रूर कराया होगा। अगर नहीं कराया है तो किसी के घर मे हवन देखा तो ज़रूर होगा। लेकिन क्या, आपने कभी सोचा है ये हवन कितने काम की चीज़ है। ये सिर्फ पूजा मात्र ही नहीं है। हवन आपके और वातावरण के लिए कितना फायदेमंद है इसके बारें में शायद आप नहीं जानते होंगें।

बदलते मौसम ने सबको तंग किया हुआ है। जैसे-जैसे मौसम करवटें बदल रहा है, बीमारियां भी कदम बढ़ा रही हैं। इसके चलते हमें कभी-कभी बड़ी ख़तरनाक बीमारी से भी जूझना पड़ता है। ऐसे में आज हम आपको एक ऐसा प्रयोग बताएंगे, जिससे बदलते मौसम में आप कभी बीमार नहीं पड़ेंगे। वो आसान सा प्रयोग है ‘हवन’, जी हां आपको बस हवन कराना होगा। चिकित्सकीय दृष्टिकोण से माना जाता है कि यह अनेक प्रकार के हानिकारक जीवाणुओं और विषाणुओं से हमें बचाता है। हवन सामग्री का प्रयोग वातावरण को शुद्ध करता है। बशर्ते इस हवन सामग्री में मिश्रित जड़ी-बूटियां शुद्ध हों और सही अनुपात में हों।

एक चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि हजारों वर्षों से पूजा एवं यज्ञ आदि में हवन सामग्री का प्रयोग होता आया है। हवन कुंड में अग्नि को प्रज्ज्वलित करने के लिए आम के पेड़ की समिधा (लकड़ी) को अधिकाधिक रूप में प्रयोग में लाया जाता है।

नवग्रह की शांति के लिए भिन्न-भिन्न लकड़ी का प्रयोग किया जाता है। जैसे-सूर्य ग्रह की शांति के लिए, मदार चंद्रमा के लिए, ढाक मंगल के लिए, खैर बुद्ध के लिए, लटजीरा बृहस्पति के लिए, पीपल शुक्र के लिए, गूलर शनि के लिए, शमी राहु के लिए, दूब केतु के लिए कुश का प्रयोग किया जाता है।

अगर आप बार बार हवन नहीं करा सकतें हैं या नहीं कर सकतें हैं, तो हफ्ते में दो दिन हवन जरूर करें। वैद्य अनुसार सामान्यतः हवन सामग्री में बालछड़, छड़ीला, कपूरकचरी, नागर मोथा, सुगंध बाला, कोकिला, हाउबेर, चंपावती एवं देवदार आदि काष्ठ औषधियों का मिश्रण होता है, जो वातावरण को शुद्ध और सुगंधित करता है।

हवन सामग्री के साथ छोटी कटेरी, बहेड़ा, अडूसा, नीम पत्र, वन तुलसी एवं वाकुची के बीज को मिलाकर यदि हवन प्रतिदिन किया जाए, तो वह घर के वातावरण को विसंक्रमित करने में अधिक प्रभावी होगा। इससे हम अनेक रोगों के संक्रमण से बचे रहेंगे।

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