Holi 2019 : जानें, कितने नुकसानदायक हैं ये चमचमाते होली के रंग

होली एक ऐसा त्यौहार है जो रंगों बिना अधूरा है। एक वक़्त था जब लोग फूलों से होली खेलते थे। वक़्त के साथ लोगों का मिजाज़ बदल गया। गुलाल एक ऐसा रंग है जिसको होली के रंगों का मुख्य रंग माना जाता है। गुलाल बिना होली अधूरी है। लेकिन आज मार्किट में गुलाल के साथ ही हर तरह का रंग देखने को मिल जायेगा। बहुत से लोग तो गुलाल को खरीदना पसंद ही नहीं करते। कुछ को काला, हरा आदि तरह के डार्क कलर ही पसंद आते हैं। इस तरह के रंग आपकी स्किन को कितना नुकसान पहुचतें है ये शायद आप जानते भी नहीं हैं।

बाज़ार में सिंथेटिक रंगों की भरमार है जो नुकसानदायक केमिकल्स से तैयार किए जाते हैं। इनमें कांच का चूरा और अल्केलाइन का भी इस्तेमाल किया जाता है। होली के कई दिनों पहले से बाज़ार में पैकबंद और खुले रंगों की ख़रीदारी शुरू हो जाती है। यह रंग केमिकल्स और धूल के साथ अन्य गंदगी से भी भरे हुए होते हैं।

इन रंगों को बनाने में किस केमिकल का इस्तेमाल होता है ये भी शायद आप नहीं जानते हैं। जिनका फायदा उठाकर दुकानदार इन रंगों को बेचकर होली के सीजन में खूब कमाई करते हैं। हर्बल रंगों को छोड़ दें, तो बाजार में उपलब्ध हर रंग केमिकल से बना है, जि‍ससे सेहत और सौंदर्य को नुकसान पहुंच सकता है।

किस केमिकल से बना है कौन सा रंग और इनके इस्तेमाल से कौन सी बीमारियां हो सकतीं हैं….

लाल : लाल रंग मरक्यूरी सल्फेट से बनता है जिससे स्किन कैंसर के अलावा लकवा और दृष्टिदोष हो सकते हैं। लाल और नारंगी रंग बनाने के लिए पलाश या टेशु के फूलों का उपयोग किया जा सकता है। इन फूलों को सुखाकर हल्दी के साथ मिलाकर इस्तेमाल करने से नारंगी रंग बनता है।

चमकदार रंग : ज़्यादातर चमकदार रंग जिनमें चमक दिखाई देती है, वो चमक कांच को पाउडर बनाकर रंगों में मिलाने से मिलती है। इस तरह के रंग स्किन के लिए बेहद खतरनाक हो सकते हैं।

काला : लेड ऑक्साइड से काला रंग बनाया जाता है। इस तत्व से किडनी पर बुरा असर पड़ता है और वो ख़राब भी हो सकती है। ये काला रंग आपके दिमाग की सीखने की क्षमता को भी प्रभावित करता है।

बैंगनी (पर्पल) : होली पर इस्तेमाल किया जाने वाला बैंगनी रंग क्रोमियम आयोडाइड से बनाया जाता है। इससे अस्थमा या एलर्जी का ख़तरा हो सकता है।

हरा : ये रंग कॉपर सल्फ़ेट से बनाया जाता है और जिसके आंख में चले जाने से आंखों में एलर्जी हो सकती है। हरा रंग प्राकृतिक तौर पर मेहंदी, धनिया पाउडर से और गुलमोहर की सुखी पत्तियों से बनाया जा सकता है जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण को सुरक्षित रखना बेहद आसान है। लेकिन उसके बाद भी इसे केमिकल से बनाया जाता है।

सिल्वर : सिल्वर रंग एल्युमिनियम ब्रोमाइड से तैयार किया जाता है, जो की एक कारसिनोजेनिक होता है। कारसिनोजेनिक को कैंसर पैदा करने वाले तत्व के रूप में जाना जाता है।

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