Holi 2019 : जानें,क्यों डालीं जाती हैं होलिका दहन मे गेहूं की बालियां

होली आने में कुछ ही दिन रह गए हैं। लोगों ने शॉपिंग शुरू कर दी है। कुछ लोग तो शॉपिंग पूरी कर भी चुके हैं। होली के एक दिन पहले होलिका दहन होता है। हर त्यौहार की कुछ मान्यताएं होती है। इसी तरह होली से जुड़ी हुई भी कुछ मान्यताएं हैं।

होली की तैयारी आठ दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। अगर आप सड़कों में चौराहे पर नज़र डालेंगे तो आपको लकड़ियों से बना हुआ एक ढ़ेर दिखाई देगा। लोग इसे बनाने के लिए आठ दिन पहले ही लकड़ियां इकट्ठा कर लेते हैं। एकत्र की गई लकड़ियों पर कच्चा सूत भी लपेटा जाता है। यह दिन होलाष्टक कहलाता है, जिसके बाद होलिका दहन के लिए इंतजार शुरू हो जाता है।

जानें,क्यों डाली जाती हैं होलिका दहन में गेहूं की बालियां

सब होली को ख़ास दिन मानते हैं लेकिन होलिका दहन का दिन ज़्यादा ख़ास होता है। होलिका दहन से पहले होलिका की पूजा की जाती है। पूजा के बाद ही उसे जलाया जाता है। इस दौरान इसकी सात बार परिक्रमा करनी होती है। माना जाता है इससे रोग और नकारात्मक शक्तियों का असर दूर हो जाता है। होलिका दहन वाली रात धार्मिक मान्यताओं के हिसाब से बेहद ख़ास मानी जाती है। शास्‍त्रों के अनुसार जिस तरह दीपावली और शिवरात्रि की रातों को दैवी शक्तियां जागृत रहती हैं, उसी प्रकार होलिका दहन की रात को भी ऐसा ही होता है।

क्यों डालीं जाती हैं गेहूं की बालियां होलिका दहन में : बरसों से चली आ रहीं परंपरा के अनुसार होलिका जलाने के दौरान उसमें मिठाइयां, सात तरह के अनाज और गेहूं की बालियां डालीं जातीं हैं। 7 नंबर को शुभ माना जाता है इसलिए ही गेहूं की सात बालियों को ही होलिका दहन में डाला जाता है। इन अनाजों को होलिका में डालना बेहद शुभ माना जाता है। फाल्गुन मास की शुरुआत से ही गेहूं का कटना शुरू हो जाता है। फसल की नई पैदावार घर-घर में खुशियां लेकर आती है और लोग घर में सुख-समृद्धि की कामना के लिए होलिका दहन के दौरान गेहूं की बालियां डालते हैं।

लोगों का ऐसा मानना है कि पहला गेहूं भगवान और पूर्वजों को भेंट करने से पूरे साल घर में उनका आशीर्वाद और सुख, शांति, समृद्धि तथा ख़ुशहाली बनी रहती है।

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