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वोट पैटर्न में मामूली बदलाव कांग्रेस के लिए कितना कारगर है!

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वोट पैटर्न में मामूली बदलाव कांग्रेस के लिए कितना कारगर है!

एक रिपोर्ट के अनुसार 150 सीटों की पहचान की गयी है जहां हार-जीत का फ़र्क़ बेहद मामूली देखने को मिला। आने वाले चुनाव में नई सरकार बनाने में इन सीटों की भूमिका अहम हो सकती है क्योंकि औसत वोट (एंटी-इनकंबेंसी) या वोट पैटर्न में थोड़े से बदलाव से इन सीटों पर नतीजा पिछले चुनाव के मुकाबले पलट सकता है। माना जा रहा है कि वोट पैटर्न में थोड़ा सा बदलाव कांग्रेस को 56 सीटें दिला सकता है।

जिस तरह परीक्षा में कुछ नम्बरों के कम आने पर कोई फेल हो जाता है उसी तरहां चुनाव में कुछ वोटों की कमी से एक उम्मीदवार हार जाता है। हार तो हार होती है चाहे वो एक नंबर से हो या कई नंबर से। जीत उसी की होती है जो ज़्यादा नंबर हासिल करता है लेकिन इस बार इन हारने वालों की ऐसी 150 सीटों की पहचान की है जहां हार-जीत का अंतर बेहद मामूली रहा था। अगर कांग्रेस की बात की जाये तो वोट पैटर्न का जरा-सा बदलाव उसकी हार को जीत में बदल सकता है।

इस लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस इन रनर-अप यानी दूसरे नंबर पर रहने वाले उम्मीदवारों की सीट को सबसे ताकतवर और जीतने वाली सीट के रूप में देख सकती है। बता दें कि कांग्रेस के पास ऐसी 56 सीटें हैं, जहां पार्टी थोड़े से अंतर से हार गई थी, लेकिन तीसरे नंबर वाले उम्मीदवार को दस फीसदी से अधिक वोटों से पीछे छोड़ने में सफल रही थी। ये देखते हुए कहना गलत नहीं होगा कि कांग्रेस इस लोग सभा चुनाव में जीत की उम्मीद रख सकती है।

अगर देखा जाये तो कांग्रेस के पास कर्नाटक में सबसे ज़्यादा ऐसी सुरक्षित सीटें हैं। कोप्पल, बेलगाम, बेल्लारी, हावेरी, बीजापुर और बीदर में कांग्रेस उम्मीदवार और जीतने वाले उम्मीदवार के बीच बहुत कम मार्जिन था। केरल दूसरे नंबर पर है जहां कांग्रेस 2014 में 7 सीटों पर मामूली वोट के अंतर से हार गई थी। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में इस तरह की क्रमशः 5, 4 और 3 सीटें हैं। देश भर में अलग-अलग पार्टियों के पास इस तरह की कुल 150 सीटें हैं।

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