फरियाद लेकर आयी विधवा अध्यापिका को सीएम की फटकार

महिला ने दिया “बेटी बचाओ”, “बेटी पढ़ाओ” का हवाला

देरहादून: राजनीति भी एक नशे की तरह है जो एक बार सिर पर चढ़ गया तो उतरने में न जाने कितना अर्सा लग जाये। ये तो राजनीति की बात हुई लेकिन अगर हम सत्ता की बात करें तो उसका नशा इस कदर नेताओं पर चढ़ता है कि कल तक जिस जनता ने उनको चुन कर भेजा है जिसकी बदौलत वो सत्ता में हैं, पद पाने के बाद ये नेता उन्हें ही भूल जाते हैं। लेकिन जब चुनाव समय आता है तो वही जनता भगवान बन जाती है। ये तो वही चरितार्थ करता है कि जब काम पड़ा, तब याद किया।

मामला सीएम दरबार का है। दरअसल उत्तराखण्ड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की जनता दरबार में एक महिला पहुंची। ये महिला विधवा टीचर थी जो मुख्यमंत्री के जनता दरबार में अपनी फरियाद लेकर पहुंची थी।लेकिन जब महिला ने अपनी फरियाद मुख्यमंत्री साहब को सुनायी तो सीएम साहब भड़क गये और महिला को संस्पेंड करने तक की धमकी दे डाली।

ये था पूरा मामला

दरअसल, फरियादी महिला की शिकायत ये थी कि उसका ट्रांसफर दूर किया जा रहा था। महिला ने सीएम रावत से कहा कि मैं 25 साल से काम कर रही हूं। मेरे पति की मौत हो चुकी है। मेरे बच्चो की देखभाल के लिए कोई नहीं है। उनका लालन-पालन मैं ही करती हूं। मैं अपने बच्चों को अकेला नहीं छोड़ सकती। लेकिन घर चलाने वाला भी कोई अन्य नहीं है इसलिए मैं नौकरी भी नहीं छोड़ सकती अपको मुझे न्याय देना होगा। इस पर सीएम भड़क गये और महिला से तीखे स्वर में कहा कि जब नौकरी शुरु की थी तो आपने क्या लिखकर दिया था। महिला ने जबाव में कहा कि मैंने बनवास भोगने को नहीं लिखा था। इसी जबाव से मुख्यमंत्री भड़क गये और कहा कि अध्यापिका हो, नौकरी करती हो, ठीक से बोलने की नसीहत दे डाली।

वीडियो में देखिए पूरा वाक्या

पूर्व सीएम ने की कड़े शब्दों में निंदा

इस पूरे प्रकरण की कांग्रेस ने कड़ी आलोचना की और कहा कि महिला अध्यापिका का निलंबन वापस लेने की मांग भी की। उत्तराखण्ड के पूर्व सीएम हरीशरावत ने कहा कि हमारा सिस्टम इतना असंवेदनशील हो चुका है कि एक विधवा का दर्द न समढते हे उसे दूर दराज के इलाके में भेजा जा रहा है जिसकी कोई सुनने वाला नहीं है। हरीश रावत ने कहा कि वे मुख्यमंत्री से कहेंगे कि वह महिला का निलंबन वापस ले।

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