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जानें, Exclusive यूपी की 26 सियासी सुपर सीटों का हाल

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जानें, Exclusive यूपी की 26 सियासी सुपर सीटों का हाल

लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखों का एलान हो चुका है। सभी पार्टियों की नजर यूपी पर है। क्योंकि केंद्र में सत्ता का रास्ता यूपी में जीत से ही मिलेगा। चाहे वोट पर्सेंटेज हो या VIP सीट्स हर मामले में यूपी आगे है।

1.वाराणसी:

देश की सबसे हाईप्रोफाइल लोकसभा सीट है। वाराणसी से सासंद खुद देश के प्रधानमंत्री मोदी है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। काशी को क्योटो बनाने का दावा करने पीएम मोदी ने वाकई काशी की सूरत बदल दी है। काशी के विकास की मिसाले पूरे देश में दी जा रही है। .2019 के लोकसभा चुनाव में भी हर कोई उम्मीद कर रहा है की पीएम मोदी वाराणसी से ही लोकसभा चुनाव लड़गे। वाराणसी सीट पर मतदान आखिरी चरण में 19 मई को होने वाला है। अब देखना ये होगा की क्या एक बार फिर काशी में मोदी मैजिक चल पाएगा की नही।

 2.अमेठी:

लोकसभा चुनाव के लिए यूपी की एक महत्वपूर्ण सीट। अमेठी लोकसभा सीट से सांसद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी हैं। अमेठी कांग्रेस और गांधी परिवार का गढ़ है। इस सीट से पहले राजीव गांधी फिर सोनिया गांधी और फिर राहुल गांधी ने चुनाव जीता है।.साल 2014 में राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को हराया था और अब 2019 का लोकसभा चुनाव भी राहुल गांधी अमेठी से ही लड़गे। 2014 में सपा ने इस सीट से अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था और अब इस बार भी सपा-बसपा गठबंधन ने ऐलान किया है की अमेठी से प्रत्याशी नही उतारेंगे। यहां अब तक हुए 16 लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने 16 बार जीत दर्ज की है। अमेठी लोकसभा सीट के पांचवे चरण में 6 मई को वोट डाले जाएंगे।

3.रायबरेली:

लोकसभा चुनाव के लिए यूपी की रायबरेली सीट काफी महत्पूर्ण सीट है। रायबेरली भी कांग्रेस और गांधी का गढ़ है। रायबरेली का प्रतिनिधित्व तो नेहरू-गांधी परिवार की दो पीढ़ियों ने समय-समय पर किया है। इस सीट पर मौजूदा सांसद यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी हैं और 2019 का भी लोकसभा चुनाव सोनिया गांधी रायबेरली से ही लड़ेगी। रायबरेली लोकसभा सीट पर पांचवे चरण में 6 मई को वोट डाले जाएंगे।

4.लखनऊ:

नवाबों के शहर लखनऊ में बीजेपी की ओर से पहले प्रधानमंत्री बने अटल बिहारी वाजपेयी की भी राजनीतिक कर्मभूमि रही है। सपा और बसपा इस सीट पर आज तक अपना खाता भी नहीं खोल सकी हैं। लखनऊ पर साल 1991 से लगातार बीजेपी का कब्जा है। मौजूदा समय में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ से सासंद है। लखनऊ लोकसभा सीट पर भी पांचवे चरण में 6 मई को वोट डाले जाएंगे।

5.मैनपूरी:

मैनपुरी को सपा का गढ़ माना जाता है। 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से सपा सरंक्षक मुलायम सिंह यादव चुनाव जीते थे। लेकिन उन्होंने इस सीट को छोड़ दिया था। जिसके बाद उनके पोते तेजप्रताप सिंह यादव उपचुनाव में बड़े अंतर से जीत कर लोकसभा पहुंचे। हालांकि, मुलायम सिंह यादव इससे पहले भी कई बार यहां से सांसद रह चुके हैं और एक बार फिर 2019 का लोकसभा चुनाव मुलायम सिंह यादव ने मैनपूरी से ही लड़ने का ऐलान कर दिया है। मैनपुरी पर मतदान 23 अप्रैल को होगा।

6.कन्नौज:

यूपी की कन्नौज लोकसभा सीट से यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव मौजूदा सांसद हैं। साल 2014 में सपा ने यहां बीजेपी को भारी मतों से हराया था। 2019 का लोकसभा चुनाव इस बार भी डिंपल यादव ने कन्नौज से लड़ेने का  ऐलान कर दिया है। कन्नौज सीट पर मतदान चौथे चरण में 29 अप्रैल को पड़ेगे।

7.आजमगढ़:

पूर्व मुख्यमंत्री और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव सांसद हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने यहां बीजेपी के बाहुबलि कैंडिडेट रमाकांत यादव, बसपा के शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली और काग्रेंस के उम्मीदवार अरविंद कुमार जायसवाल को भारी मतों से हराया था। लेकिन इस बार मुलायम सिंह यादव मैनपूरी से चुनाव लड़ने वाले है। ऐसे में अटकलें ये लगाई जा रही है की प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आजमगढ़ से चुनाव लड़ सकते है। आजमगढ़ सीट पर मतदान छठे चरण में 12 मई को होंगे।

8.मुजफ्फरनगर:

इस सीट पर हर किसी की नजर टिकी है। पश्चिमी यूपी के ‘जाटलैंड’ के नाम से मशहूर ये क्षेत्र अभी बीजेपी के कब्जे में है। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले साल 2013 में यहां हुए दंगों ने सियासी दंगल खड़ा कर दिया था। मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भाजपा के डॉ संजीव बालियान हैं। डॉ संजीव बालियान ने बसपा के कादिर राणा को भारी वोटों से हराया था। इस सीट पर 16 साल बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में कमल खिला था। इस सीट से एक बार फिर चौधरी अजित सिंह 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ने वाले है। इस सीट पर मतदान पहले चरण 11 अप्रैल को होगा।

9.बागपत:

बागपत पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सियासी गढ़ और जाटलैंड माना जाता है। बागपत लोकसभा सीट पर पूरे देश की नज़रे हैं। देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह यहां से सांसद रह चुके हैं और उसके बाद उनके बेटे अजित सिंह ने यहां पर कई बार चुनाव जीता। लेकिन 2014 में चली मोदी लहर के दम पर बीजेपी ने यहां परचम लहराया और मुंबई पुलिस के कमिश्नर रह चुके बीजेपी के सत्यपाल सिंह सांसद चुने गए। जबकि अजित सिंह इस सीट पर तीसरे नंबर पर रहे थे। सियासी महत्व के अलावा बागपत का इतिहास भी काफी दिलचस्प है, बागपत पांडवों द्वारा बसाया गया एक पुराना शहर है। 2019 के लोकसभा चुनाव में बागपत में कई समीकरण बदलने की उम्मीद है। क्योंकि मुकाबला यहां भी त्रिकोणीय होने वाला है।

10.प्रयागराज:

संगम नगरी अपनी सभ्यता संस्कृति और सियासत के जानी जाती है। संगम नगरी में लगे कुंभ में भी अभी खूब सियासत हुई थी। इलाहाबाद के मौजूदा सांसद बीजेपी के श्यामाचरण गुप्ता हैं। योगी सरकार ने इलाहाबाद का नाम प्रयागराज कर दिया गया है। प्रयागराज लोकसभा सीट देश की एक महत्वपूर्ण सीटों में शामिल है। महत्वपूर्ण इस लिए की इसी सीट ने देश को दो प्रधानमन्त्री दिए, हेमवतीनंदन बहुगुणा, मुरली मनोहर जोशी और जनेश्वर मिश्र जैसे दिग्गज नेता दिए। बालीवुड के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन भी इलाहाबाद लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इस बार फिर से हर पार्टी यहां झंडा फहराना चाहती है। लेकिन बीजेपी का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है।

11.गौतमबुद्धनगर:

गोतमबुद्धनगर लोकसभा सीट देश की राजधानी दिल्ली से सटी ऐसी वीआईपी सीट है। जो हर चुनाव के केंद्र में रहती है। ये सीट अभी बीजेपी के खाते में है। यहां से बीजेपी के सांसद महेश शर्मा केंद्र सरकार में मंत्री हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल में गौतम बुद्ध नगर का विस्तार हुआ, जिसके बाद से ये सीट सियासी लिहाज़ से हमेशा सुर्खियों में रहने लगी। इस सीट पर गुर्जर समाज के वोटरों की संख्या सबसे ज्यादा है। ऐसे में लोकसभा चुनाव में इस सीट पर सभी की नजरें हैं। गौतमबुद्धनगर उत्तर प्रदेश की सबसे हाईप्रोफाइल सीटों में शामिल है।

12.फैजाबाद:

भगवान राम की नगरी अयोध्या हर बार सियासत का मैदान बनती है। फैजाबाद लोकसभा सीट पर हर तरह इस बार भी पूरे देश की नज़र है। मौजूदा वक्त में फैजाबाद लोकसभा सीट से बीजेपी के लल्लू सिंह सांसद हैं। धर्म और राजनीति दोनों के केंद्र में रहने वाली फैजाबाद सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती है। अयोध्या एक मात्र ऐसी सीट है जो विदेशी मीडिया की हेडलाइन बनती है। इस सीट पर देश के साथ विदेशों की भी नज़रे रहती हैं। धार्मिक नगरी को फतह करने के लिए सभी दलों ने जान झौंक रखी है।

13.मिर्जापुर:

यूपी उन चंद चुनिंदा संसदीय सीटों में से एक है जिसकी अपनी ही राजनीतिक महत्ता है। यहां से अपना दल की नेता अनुप्रिया सिंह पटेल सांसद हैं, इस पार्टी ने 2014 का लोकसभा चुनाव बीजेपी के साथ मिलकर लड़ा था लेकिन इस बार अनुप्रिया के सामने चुनौती ये है की सपा-बसपा के गठबंधन का मुकाबला कैसे करेंगी। अनुप्रिया पटेल केन्द्रीय परिवार कल्याण और स्वस्थ्य राज्यमंत्री भी हैं। ऐसे में उन्हें अपनी साख बचाना बडी चुनौती है।

14.मुरादाबाद:

कभी कांग्रेस का गढ़ रही ये सीट कई बार सपा के कब्जे में भी आई, लेकिन 2014 में पहली बार यहां बीजेपी का परचम लहराया और कुंवर सर्वेश कुमार यहां से सांसद चुने गए। इस सीट से भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन भी सांसद रह चुके हैं। मुरादाबाद पश्चिम की पीतल नगरी के नाम से भी मशहूर है। इस बार यहां पर त्रिकोणीय मुकाबला है। जो बेहद दिलतस्प होने वाला है।

15.बलिया:

क्रांतिकारियों की धरती बलिया की सियासत बहुत खास है। मौजूदा वक्त में बलिया से बीजेपी के भरत सिंह सांसद हैं। 2014 में सपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था और बीजेपी ने शानदार जीत दर्ज की थी। बलिया ने आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी। बलिया मंगल पांडे, चंद्रशेखर और छोटे लोहिया के नाम से जाने जाने वाले जनेश्वर मिश्र की कर्मभूमि रही है। बलिया यूपी की हाईप्रोफाइल सीट है। इसे फतह करने के लिए सभी पार्टियों ने जान झोंकी हुई है। गठबंधन में ये सीट सपा के पास है और यहां गठबंधन इस बार बीजेपी को कड़ी टक्कर दे रहा है।

16. फिरोजाबाद:

सपा की दूसरी पीढ़ी के नेता अक्षय यादव सांसद हैं। 2014 के चुनाव में उन्होंने यहां पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की और पहली बार लोकसभा में पहुंचे थे। जाट और मुस्लिम वोटरों के वर्चस्व वाली इस सीट पर इस बार भी निगाहें टिकी हैं। सपा और बसपा के गठबंधन के बाद सपा के अलग हुए शिवपाल यादव ने यहां से चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है। फिरोजाबाद में चाचा भतीजे में सियासी जंग होगी। बीजेपी का दावा भी यहां पर मजबूत है। मौजूदा वक्त में फिरोज़ाबाद की सियासत बेहद दिलचस्प हो गई है।

17.अलीगढ़:

लोकसभा चुनाव के लिहाज से काफी अहम शहर है। पश्चिमी यूपी की एक प्रमुख सीट होने के अलावा यहां की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी भी काफी सुर्खियां बटोरती है। मौजूदा समय में ये सीट बीजेपी के खाते में है। हाल ही के समय में अलीगढ़ पाकिस्तान के जनक माने जाने वाले मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर पर काफी बवाल हुआ था। इस सीट पर मुस्लिम वोटरों का भी काफी प्रभाव है, अलीगढ़ की चुनावी जंग दिलचस्प इसलिए हो गई है क्योंकि AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के अलीगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है।

18.प्रतापगढ़:

यहां से अपना दल के कुंवर हरिबंश सिंह सांसद हैं। उन्होंने बसपा को हराकर ये सीट जीती थी लेकिन इस बार राजा भैया यहां से चुनाव के मैदान में उतर सकते हैं। सियासत में राजा भैया की पार्टी का जन्म हो चुका है। राजा भैया पूर्वाचंल के कद्दावर नेता हैं और प्रतापगढ़ उनके चुनाव का पहला मैदान बन सकता है। देश के प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने अपना राजनीतिक करियर शुरू किया था। यहीं पर राष्ट्रीय कवि हरिवंश राय बच्चन का जन्म हुआ था। राजा भैया के यहां से चुनाव लड़ने की संभावनाओं के बाद यहां की सियसत बेहद गर्म है।

19.मऊ:

राजनीतिक रूप से ये शहर बाहुबली मुख्तार अंसारी और उनके परिवार के प्रभाव की वजह से जाना जाता है। मुख्तार अंसारी अभी BSP में हैं। मऊ घोसी लोकसभा में पड़ता है और गठबंधन में ये सीट BSP के पास है। उन चंद सीटों में शामिल है जहां कांग्रेस का कभी भी गढ़ नहीं रहा। इस बार भी मुकाबला बीजेपी और गठबंधन के बीच है।

20.बरेली:

ये सीट राजनीतिक लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। पिछले करीब तीन दशक से इस सीट पर बीजेपी का एक छत्र राज रहा। यहां से सांसद संतोष गंगवार कई बार इस सीट पर चुनाव जीत चुके हैं और इस समय केंद्र सरकार में मंत्री है। बरेली क्षेत्र में संतोष गंगवार का राजनीतिक दबदबा है। 2019 में एक बार फिर बीजेपी को उम्मीद रहेगी कि संतोष गंगवार पार्टी के लिए यहां से कमल खिलाएं। संतोष गंगवार के सामने विरोधियों का गठबंधन बेदम दिखाई देता है। माना जा रहा है संतोष गंगवार फिर से इतिहास दोहराएंगे।

21.गाजीपुर:

2014 में गाजीपुर से बीजेपी के मनोज सिन्हा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। यहां दूसरे नंबर पर सपा थी और तीसरे पर बीएसपी। इस बार बीजेपी का सीधा मुकालबा गठबंधन से है। लेकिन कांग्रेस का प्रत्याशी यहां से किसी का भी खेल बिगाड़ सकता है। गाजीपुर से इस बार मुख्तार अंसारी या अफजल अंसारी भी चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। गाजीपुर मुख्तार अंसारी की जन्मभूमि है। गठबंधन के मजबूत होने के कारण इस बार बीजेपी के मनोज सिन्हा के जीत एक चुनौती बन गई है।

22.सुल्तानपुर:

ये सीट हाईप्रोफाइल इसलिए है क्योंकि गांधी परिवार के सदस्य वरुण गांधी यहां से बीजेपी के सांसद हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में वरूण गांधी ने बसपा के पवन पांडेय को हराकर ये जीत हासिल की थी। सुल्तानपुर की गिनती देश के प्राचीन शहरों में होती है। भगवान राम के पुत्र कुश ने इस जिले को बसाया था। सुल्तानपुर में सपा-बसपा के गठबंधन के बाद मुकाबला दिलचस्प हो सकता है क्योंकि पिछली बार वरुण गांधी को किसी ने भी टक्कर नहीं दी थी। लेकिन इस बार दो बड़ी पार्टियां एक साथ तो वरुण गांधी को टक्कर मिलने की संभावना है।

 23.गोरखपुर:

ये सीट बीजेपी का मजबूत दुर्ग मानी जाती है। मौजूदा वक्त में गोरखपुर से सपा के प्रवीण निषाद सांसद हैं, उन्होंने 2018 में हुए यहां के उपचुनाव में जीत हासिल करके गोरक्षपीठ के सांसद निर्वाचित होने की परंपरा को तो तोड़ा ही, साथ में यूपी समेत पूरे देश में एक नए सियासी समीकरण को भी बीजेपी के सामने खड़ा कर दिया। शिक्षा, संस्कृति और परंपरा को समेटे गोरखपुर की लोकसभा सीट हमेशा से ही राजनीति के लिए महत्वपूर्ण रही। यूपी के पूर्वाचल में बसा ये क्षेत्र गोरखनाथ मन्दिर की वजह से दुनिया भर में मशहूर है, ये वो जिला है जिसमे संत कबीर, मुंशी प्रेमचंद, फ़िराक गोरखपुरी जैसे विश्व प्रसिद्ध लोग हुए। गोरखपुर देश की हाईप्रोफाइल सीटों में शामिल है।

24.इटावा:

य़ादव परिवार का वो किला जिसे भेदने में कई दिग्गजों के पसीने छूट गए। लेकिन 2014 के चुनाव में चले मोदी मैजिक यहां पर भी कमल लहरा गया है। इटावा लोकसभा सीट से बीजेपी के अशोक कुमार दोहरे सांसद हैं। यादव कुनबे के सामने चुनौती ये है की वो अपनी साख बचाने में कामयाब पाएगा या नहीं। क्यों सपा-बसपा साथ मिलकर अपने गढ़ में बीजेपी से टकराने उतरी है।

25.कानपुर:

गंगा के किनारे बसा औद्योगिक शहर कानपुर देश की हाई प्रोफाइल लोकसभा सीटों मे से एक है। इसे ‘लेदर सिटी’ के नाम से भी जाना जाता है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी को मैदान में उतारकर कांग्रेस की ओर से जीत की हैट्रिक लगा चुके श्रीप्रकाश जायसवाल को करारी मात दी थी और यहां से भगवा ध्वज फहराने में कामयाब रही थी। लेकिन इस बार मुरली मनोहर जोशी के चुनाव लड़ने की संभावना बहुत कम है अगर मुरली मनोहर जोशी चुनाव नहीं लड़ते हैं, तो बीजेपी के सामने मुरली मनोहर जैसे मजबूत प्रत्याशी उतारना चुनौती हो सकती है।

26.फूलपुर:

2018 के शुरु में यहां भी उपचुनाव हुए थे। सपा ने केशवप्रसाद मोर्या का धव्स्त कर दिया और ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। सपा के नागेंद्र पटेल यहां से सांसद चुने गए। ये हार यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के लिए बड़ा झटका थी। लेकिन इस बार बीजेपी के पास मौका है की वो खोई इज्जत और सीट दोनों वापस ले आए। लेकिन बीजेपी के लिए आसान इसलिए नहीं है क्योंकि जिन सपा-बसपा ने मिलकर बीजेपी को हराया था वो फिर से एक साथ हैं।

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