मायावती : मुझे बगैर किसी सुनवाई के असंवैधानिक तरीके से वंचित किया गया

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने चुनाव आयोग द्वारा उन पर लगाए गए 48 घंटे के प्रतिबंध को दबाव में लिया गया फैसला करार देते हुए कहा कि यह एक साजिश और लोकतंत्र की हत्या है। पिछले सप्ताह मायावती ने देवबंद में एक रैली की थी। इसी रैली के दौरान उन्होंने मुस्लिमों से अपने वोट को न बंटने देने की बात कही थी।

बसपा प्रमुख मायावती पर किसी भी चुनावी गतिविधि में शामिल होने पर 48 घंटे के प्रतिबंध की मियाद आज सुबह छह बजे से शुरू हो गयी। 15 अप्रैल देर रात प्रेस कांफ्रेंस में मायावती ने कहा, आयोग ने सहारनपुर के देवबंद में दिये गये बयान पर उनकी सफाई को नजरअंदाज करते हुए उन पर पाबंदी लगा दी और यह लोकतंत्र की हत्या है। उन्होंने कहा कि ‘संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत किसी को अपनी बात रखने से वंचित नहीं किया जा सकता लेकिन आयोग ने अभूतपूर्व आदेश देकर मुझे बगैर किसी सुनवाई के असंवैधानिक तरीके से क्रूरतापूर्वक वंचित कर दिया। यह दिन काला दिवस के रूप में याद किया जाएगा। यह फैसला किसी दबाव में लिया गया ही प्रतीत होता है।’

मायावती ने कहा कि आयोग को अच्छी तरह मालूम है कि लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण कर मतदान 18 अप्रैल को है और प्रचार का समय 16 अप्रैल को खत्म हो जाएगा। हमें अपने कार्यकर्ताओं पर पूरा भरोसा है कि वह आयोग के इस फैसले के पीछे की मंशा को जरूर समझेंगे और निडर होकर बसपा तथा गठबंधन प्रत्याशियों को पूरा समर्थन देकर भाजपा तथा अन्य विरोधियों की जमानत जब्त कराएं।

चुनाव आयोग के फैसले से नाखुश मायावती ने कहा कि चुनाव आयोग ने अमित शाह और पीएम मोदी को लोगों के बीच नफरत फैलाने की खुली छूट दी हुई है। मुझे तो ऐसा लगता है कि जब इन दोनों की बात आती है तो चुनाव आयोग अपने कान और आंख बंद कर लेती है।

बता दें कि चुनाव आयोग द्वारा मायावती पर 48 घंटे का बैन लगाने के कारण वह गठबंधन की आगरा में होने वाली रैली में हिस्सा नहीं ले पाएंगी। आगरा में आज चुनाव प्रचार का आखिरी दिन है।

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