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जानें क्या था ‘गेस्ट हाउस कांड’, जिससे सपा-बसपा बन गए थे धुर-विरोधी

जानें क्या था 'गेस्ट हाउस कांड', जिससे सपा-बसपा बन गए थे धुर-विरोधी

राजनीति मौकों का खेल है। यहां कोई परमानेंट दोस्त या दुश्मन नहीं होता। जो कल तक एक दूसरे की शक्ल देखना पसंद नहीं करते थे वो आज 23 साल की पुरानी दुश्मनी भुलाकर एक मंच पर आने को तैयार हैं। शनिवार को लखनऊ में एक ऐसी ऐतिहासिक तस्वीर देखने को मिलेगी जिसमें सपा प्रमुख अखिलेश यादव और BSP सुप्रीमो मायावती की जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। लोकसभा चुनाव 2019 के लिए दोनों में गठबंधन पूरा तय हो चुका है। आज सीट बंटवारे और गठबंधन को लेकर औपचारिक ऐलान होगा। बता दें दोनों पार्टी में यह गठबंधन 23 साल बाद हो रहा है।



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इससे पहले साल 1993 में जब सपा-बसपा में गठबंधन हुआ था तब यूपी में बाबरी विध्वंस के बाद राष्ट्रपति शासन चल रहा था। मंदिर-मस्जिद विवाद के कारण वोटों का ध्रुवीकरण अपने चरम पर था। यह बात सभी राजनीतिक दल समझ चुके थे। इसी के मद्देनजर प्रदेश की दो धुरविरोधी पार्टियां सपा और बसपा ने साथ चुनाव लड़ने का फैसला लिया।

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इस चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। इसके बाद गठबंधन ने 4 दिसंबर 1993 को सत्ता की कमान संभाल ली। लेकिन, 2 जून, 1995 को BSP ने सरकार से किनारा कर लिया और समर्थन वापसी की घोषणा कर दी और दोनों का गठबंधन टूट गया। BSP के समर्थन वापसी से मुलायम सिंह की सरकार अल्पमत में आ गई। 3 जून, 1995 को मायावती ने भाजपा के साथ मिलकर सत्ता की कमान संभाली।

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2 जून 1995 को प्रदेश की राजनीति में जो हुआ वह शायद ही कभी हुआ हो। उस दिन एक उन्मादी भीड़ सबक सिखाने के नाम पर मायावती की इज्ज़त पर हमला करने पर आमादा थी। उस दिन को लेकर कई बातें होती रहती हैं। यह आज भी एक चर्चा का विषय है कि 2 जून 1995 को लखनऊ के गेस्टहाउस कांड में हुआ क्या था?

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मायावती के समर्थन वापसी के बाद जब मुलायम सरकार पर संकट के बादल आए तो सरकार को बचाने के लिए जोड़-तोड़ शुरू हो गयी। ऐसे में अंत में जब बात नहीं बनी तो सपा के नाराज कार्यकर्ता और विधायक लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्टहाउस पहुंच गए,जहां मायावती ठहरी हुईं थीं। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जाता है कि उस दिन गेस्ट हाउस के कमरे में बंद BSP प्रमुख के साथ कुछ गुंडों ने बदसलूकी की। बसपा के मुताबिक सपा के लोगों ने तब मायावती को धक्का दिया और मुक़दमा ये लिखाया गया कि वो लोग उन्हें जान से मारना चाहते थे। इसी कांड को ‘गेस्टहाउस कांड’ कहा जाता है।

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अखिलेश और मायावती दोनों ने साथ आने के संकेत काफी पहले से मिलने शुरू हो गए थे। इस जोडी का फॉर्मूला गोरखपुर व फूलपुर में हुए उपचुनाव में निकला। जहां भाजपा लोकसभा चुनाव में डंके बजाने वाली भाजपा को चारो खाने चित होना पड़ा। अखिलेश यादव खुद मायावती को इसकी बधाई देने उनके घर गए थे।

इसमें कोई दो राय नहीं मायावती के जेहन में आज भी गेस्टहाउस कांड जिंदा है, तभी तो एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान माया ने इस कांड को लेकर अखिलेश यादव का बचाव किया था और कहा था कि उस वक्त अखिलेश राजनीति में आए भी नहीं थे।

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