पहले चरण के मतदान से पहले बीजेपी को सुप्रीम कोर्ट से राफेल मामले में लगा झटका

राफेल विमान मामले में केंद्र की मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है गलत ढंग से हासिल गोपनीय दस्तावेजों के आधार पर मामले की सुनवाई होगी। इससे पहले कोर्ट ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर गलत ढंग से हासिल गोपनीय दस्तावेजों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट से मामले की सुनवाई की याचिका खारिज करने की अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने केंद्र की इस याचिका को खारिज कर दिया है।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई समेत 3 जजों की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राफेल पर अपने फैसले के खिलाफ दाखिल रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई को तैयार हो गई। कोर्ट के फैसले के बाद याचिकाकर्ता अरुण शौरी ने कहा कि चीफ जस्टिस ने कहा है कि वह जल्द ही सुनवाई की तारीख के बारे में आदेश जारी करेंगे। साथ ही अरुण शौरी ने कहा कि 3 जजों ने फैसला दिया और सरकार के तर्क को खारिज किया की यह चोरी के डॉक्युमेंट हैं, इसलिए इसे कोर्ट में पेश नहीं किया जा सकता है।

इससे पहले केंद्र सरकार ने कहा था कि ये विमान की कीमतों से संबंधित दस्तावेज रक्षा मंत्रालय में चोरी से फोटोकापी कर कोर्ट में पेश किए गए हैं। इन पर कोर्ट को संज्ञान नहीं लेना चाहिए। सरकार इस मामले आंतरिक जांच भी करवा रही है। इन दस्तावेजों को यदि सुप्रीम कोर्ट ने विचार योग्य माना तो राफेल फैसले की समीक्षा करने की याचिका पर आगे बढ़ा जाएगा। ये याचिका यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी ने दायर की है। इससे पूर्व कोर्ट ने राफेल पर केंद्र सरकार को क्लीन चिट दे दी थी और कहा था कि इसकी खरीद में जांच करने का आदेश देने का कोई आधार नहीं है। इस फैसले के खिलाफ की समीक्षा याचिका दायर की गई है।

वहीं याचिकाकर्ता का कहना है कि किसी धांधली व भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए कोई काग़ज किसी भी तरीक़े से हासिल कर उसे कोर्ट के सामने रखा जाता है तो भ्रष्टाचार साबित करने की मांग को देखते हुए अदालत को उनपर भी गौर करना चाहिए। साथ ही याचिकाकर्ताओं ने कहा कि किसी विभाग में धांधली पकड़वाने के लिए गोपनीय तरीके से सबूत देने वाले विहसल ब्लोवर की पहचान और सबूत जुटाने का तरीका कानून में पूछने का अधिकार किसी के पास नहीं है। सुप्रीम कोर्ट अगर यह फैसला सुनाती है कि भ्रष्टाचार साबित करने के लिए गलत ढंग से हासिल दस्तावेज के आधार पर सुनवाई हो सकती है तो राफेल डील पर को लेकर एक बार फिर सुनवाई होगी।

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