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सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और हाईकोर्ट जजों की नियुक्ति पर रखा अपना पक्ष, कहा- जल्द…नहीं तो हम


देश में कई ऐसे संस्थान है जहां जितनी नियुक्ति होनी चाहिए उसकी आधी भी नहीं हैं। ऐसा ही कुछ हाल देश की कोर्ट्स का है जिससे की सुप्रीम कोर्ट खुश नहीं है। बता दें की सुप्रीम कोर्ट देशभर में जजों की नियुक्ति की धीमी रफ्तार से खुश नहीं है और सभी राज्यों और हाईकोर्ट्स से न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर उठाए जा रहे कदमों की पूरी जानकारी मांगी है।

सर्वोच्च अदालत ने साफतौर पर राज्य और हाईकोर्ट जजों की नियुक्ति पर रखा अपना पक्ष रखा है और साफ कहा है कि अगर आप खाली जगहों को नहीं भर सकते हैं, तो हम आपसे ये काम लेकर खुद करेंगे और इसके लिए केंद्रीकृत प्रक्रिया बनाएंगे।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट मानता है कि राज्य द्वारा नियुक्ति को लेकर जो कोशिशें की जा रही है वो बेहत साधारण है। जहां इसी वजह चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ने देशभर की निचली अदालतों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के हालात का जायजा लेने के बाद ये निर्देश दिए है।




देश में आए दिन हजारों लाखों केस कोर्ट्स में दस्तक देते है लेकिन उन पर सुनवाई को कोई जज नहीं होता। कानून मंत्रालय द्वारा जारी किए गए डाटा के मुताबिक, देश में 10 लाख की आबादी पर सिर्फ 19 जज हैं। निचली अदालतों में 5748 और 24 हाईकोर्ट में 406 जजों के पद खाली हैं।

गौरतलब है कि देश में मौजूदा हाल से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट को सुझाव दिया गया था कि न्यायिक कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए सात गुना तक बढ़ाया जाना चाहिए और जिसके मुताबिक अगले कुछ साल में 15 हजार न्यायाधीशों की नियुक्ति होनी जरूरी।

निचली अदालत में 22,474 एप्रूव्ड पद हैं। जबकि, इनमें 16,726 जज काम कर रहे हैं। हाईकोर्ट में 1079 पदों की तुलना में 673 जज हैं। सुप्रीम कोर्ट में 31 में से 6 पद खाली हैं। सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और निचली अदालतों में कुल मिलाकर 6160 जजों के पद खाली हैं।

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