डॉ. उर्मिलेश कुमार शंखधार का गांव आज भी असुविधा का दंश झेल रहा है

बदायूं की शान डॉ. उर्मिलेश कुमार शंखधार उन शक्सियत में से थे जो अपना नाम जपनद और देश दुनिया में अमर कर गए। वह तो इस दुनिया में नही रहे लेकिन साहित्य के धनी, कवि  डॉ. उर्मिलेश कुमार शंखधार ने जो कविताएं, गीत और साहित्य लिखा उसका ज़िक्र आज भी लोग अक्सर किया करते हैं।

जन कवि पंडित भूपराम शर्मा के कुलदीपक डॉ. उर्मिलेश कुमार शंखधार ने 6 जुलाई 1951 इस्लामनगर, बदायूं स्थित अपने ननिहाल में जन्म लिया था। लेकिन उनका गांव आज भी सुख सुविधाओं से वंचित दिख रहा है, खास बात यह है कि उन्होंने अपनी कविता में एक लाइन लिखी थी। सोत नदी बहती है…. जिसके लिए उन्हें उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान ने पुरस्कृत किया था। मगर आज उनके गांव की जनपद की सोत नदी सुख चुकी है, अधिकांश सोत नदी पर अवैध कब्जा सा होता दिख रहा है, गांव के किसान परेशान दिखाई दे रहे हैं। कच्चा पुल तो पक्का हो गया मगर सोत स्त्रोत सूख गए। गांव में प्राथमिक उपाचार तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। प्राथमिक, जूनियर हाईस्कूल के बाद बच्चों को गांव से 15 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। गांव का मुख्य संपर्क मार्ग बदहाल है, गांव के अंदर सीसी रोड तक नही है ,साफ- सफाई तक नही दिखती, गांव के सरकारी स्कूल में लगा नल बस दिखावे के लिए लगा है। गांव की ऐसी हालत देख कर कहना गलत नहीं होगा कि डॉ. उर्मिलेश कुमार शंखधार का गांव आज भी असुविधा का दंश झेल रहा है।

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