अगर आंखों का रखना है ख्याल तो मोबाइल को रखना होगा दुर

दुनियाभर में कई करोड़ लोग हैं जो अपना ज्यादा से ज्यादा किमती समय रोजमर्रा की जिंदगी मोबाइल, टैब और लैपटॉप के जरिए निकाल देतें हैं। मोबाइल, टैब और लैपटॉप पर जरूरत से ज्यादा समय बिताने और आउटडोर गेम्स न खेलने से बच्चों की दूर की नजर कमजोर हो जाती है। एम्स के डॉक्टरों ने यह चेतावनी देते हुए बताया कि इन इलेक्ट्रॉनिक गैजट्स को लगातार पास से देखने के कारण आंखों पर जोर पड़ता है और आंखों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।

गैजट्स संग 30-40% समय बिताते हैं बच्चे

बताया गया है कि इन दिनों बच्चे टैब, मोबाइल और लैपटॉप पर अपना 30 से 40 % वक्त बिता रहे हैं। इससे उनकी आंखों की रोशनी पर ज्यादा असर पड़ता है साथ ही नजदीक की चीजें देखने के आदी हो जाते हैं, जबकि इससे दूर की नजर कमजोर हो जाती है। डॉक्टरों ने आशंका जतायी कि घरों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बढ़ती पैठ से भविष्य में यह समस्या और विकराल रुप धारण कर सकती है।

जा सकती है आंखों की रोशनी

बचपन में ही दूर की नजर कमजोर होने या चश्मा लगने का हानिकारक प्रभाव यह है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे चश्मे का नम्बर भी बढ़ने लगता है। हमारा मानना है कि अब से 20 साल पहले जिन बच्चों की दूर की नजर कमजोर थी, अब वे बड़े हो गए हैं और अगर उनके चश्मे का नंबर माइनस 10 या 12 हो गया है तो उनकी आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा हो सकता है।

अंधेरे में न चलाएं मोबाइल

अंधेरे में मोबाइल चलाने से न तो केवल दूर देखने की क्षमता पर असर पड़ता है, बल्कि पूरी दृष्टि के ही प्रभावित होने का खतरा भी होता है। कई लोगों में एक आंख की रोशनी जाने की समस्या सामने आई है। ये लोग लेटकर इस तरह मोबाइल देखते थे कि उनकी एक आंख बंद हो जाती थी।

ऐसे करें बचाव

बच्चों को रोजाना कम से कम 1 घंटा घर से बाहर बिताना चाहिए। इससे आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है और दूर की नजर खराब होने का खतरा 20 प्रतिशत तक कम हो जाता है। बच्चों को टीवी, मोबाइल आदि पर दिन में 1-2 घंटे से ज्यादा वक्त नहीं बिताना चाहिए। जितना ज्यादा वक्त इन पर बिताया जाएगा, चश्मा लगने उतना ही ज्यादा खतरा बड़ सकता है।

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