जलियांवाला बाग के नरसंहार कांड को आज हुए 100 साल, राहुल गांधी ने दी श्रद्धांजलि

अमृतसर के जलियांवाला बाग के नरसंहार कांड के आज यानी शनिवार को 100 साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर वहां एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अमृतसर पहुंचे। राहुल ने शनिवार सुबह 8 बजे शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

इससे पहले शुक्रवार देर रात अमृतसर पहुंचे राहुल गांधी ने श्री अकाल तख्त गोल्डन टैम्पल में माथा टेका। इस दौरान उनके साथ पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह भी मौजूद रहे। शनिवार को जलियांवाला बाग के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए शताब्दी समारोह का आयोजन किया जा रहा है।

इस मौके पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इससे पहले शुक्रवार शाम राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर, सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कैंडल मार्च निकालकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। कैंडल मार्च में कैबिनेट मंत्री सुखबिंदर सिंह सुखसरकरिया, ओम प्रकाश सोनी, सुनील जाखड़, आशा कुमारी, गुरजीत औजला, सुनील दत्ती, इंदरबीर बुलारिया, राजकुमार वेरका के अलावा स्टूडेंट्स ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम के लिए यहां पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पंजाब पुलिस के साथ साथ BSF को भी जलियावालां बाग में तैनात किया गया है।

क्या है जलियांवाला बाग हत्याकांड, जाने:

देश की आजादी के इतिहास में 13 अप्रैल का दिन एक दुखद घटना के साथ दर्ज है। वह साल 1919 का 13 अप्रैल का दिन था, जब जलियांवाला बाग में एक शांतिपूर्ण सभा के लिए जमा हुए हजारों भारतीयों पर अंग्रेज हुक्मरान ने अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। उस दिन बैसाखी थी। एक बाग़ में करीब 15 से बीस हज़ार हिंदुस्तानी इकट्ठा थे। सब बेहद शांति के साथ सभा कर रहे थे। ये सभा पंजाब के दो लोकप्रिय नेताओं की गिरफ्तारी और रोलेट एक्ट के विरोध में रखी गई थी। पर इससे दो दिन पहले अमृतसर और पंजाब में ऐसा कुछ हुआ था, जिससे ब्रिटिश सरकार गुस्से में थी।

इसी गुस्से में ब्रिटिश सरकार ने अपने जल्लाद अफसर जनरल डायर को अमृतसर भेज दिय़ा। जनरल डायर 90 सैनिकों को लेकर शाम करीब 4 बजे जलियांवाला बाग पहुंचता है। डायर ने सभा कर रहे लोगों पर गोली चलवा दी। बताते हैं कि 120 लाशें तो सिर्फ उस कुएं से बाहर निकाली गई थी जिस कुएं में लोग जान बचाने के लिए कूदे थे। कहते ये भी हैं कि करीब दस मिनट में 1650 राउंड गोलियां चलाने के बाद जनरल डायर इसलिए रुक गया था क्योंकि उसके सैनिकों की गोलियां खत्म हो गई थीं। अंग्रेजों के आंकड़े बताते हैं कि जलियांवाला बाग कांड में 379 लोग मारे गए थे।

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