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सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहे शिक्षामित्रों की क्या है मांग और क्या है मामला ?

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सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहे शिक्षामित्रों की क्या है मांग और क्या है मामला ?

उत्तर प्रदेश में लगातार शिक्षामित्र अपनी मांगों को लेकर आए दिन धरना-प्रर्शन कर रहे हैं और वो लगातार केंद्र और राज्य सरकार के सामने गुहार लगा रहे हैं। शिक्षामित्रों का आरोप है कि, साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि, शिक्षामित्र हमारे अपने हैं और उनकी मांगों को सरकार बनने के बाद पूरा किया जाएगा। लेकिन, केंद्र सरकार की तरफ से अभी तक कोई व्यापक कदम नहीं उठाए गए हैं।

शिक्षामित्रों की मांग है कि, उनको अनुसूची-9 में शामिल किया जाए और साथ ही सामान वेतन का प्रस्ताव भी पारित किया जाए। शिक्षामित्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा से मुलाकात के दौरान अपनी मांगों के बारे में शिक्षामित्रों ने बताया था। लेकिन अभी तक इस बारे में सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है और कई सारे शिक्षामित्रों की सदमे की वजह से जान तक चली गई है।

शिक्षामित्रों के मामले में कब क्या हुआ:-

26 मई 1999:- यूपी सरकार ने बारहवीं पास दो शिक्षामित्रों को 11 महीने की संविदा पर प्राइमरी स्कूल में नियुक्त करने का शासनादेश दिया।

2001:- 2250 रुपये के मानदेय पर शिक्षामित्रों की नियुक्ति शुरु हुई।

2005:- मानदेय 2400 रुपये, फिर 2007 में- 3000 रुपये और फिर 2010 में- 3500 रुपये मानदेय कर दिया गया।

4 अगस्त 2009:- शिक्षा का कानून लागू हुआ जिसके मुताबिक, कक्षा एक से आठ से अप्रशिक्षित शिक्षक स्कूलों में नहीं पढ़ा सकते।

2 जून 2010:- कोर्ट ने शिक्षामित्रों की नियुक्ति पर रोक लगाई।

11 जुलाई 2011:- बसपा सरकार ने पौने दो लाख शिक्षामित्रों को बीटीसी का दो वर्षिय प्रशिक्षण देने का फैसला किया।

19 जुन 2014:- सपा सरकार ने 58 हजार प्रशिक्षित शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन करके वेतन 30 हजार से ज्यादा कर दिया।

8 अप्रैल 2015:- दूसरे चरन में सपा सरकार ने 90 हजार समायोजन कराया।

12 सितंबर 2015:- हाइकोर्ट ने शिक्षामित्रों के समायोजन अवैध ठहराते हुए इस रद्द कर दिया।

7 दिसंबर 2015:- सुप्रीम कोर्ट ने बचे हुए शिक्षामित्रों के समोजन पर भी रोक लगाई।

25 जुलाई 2017:- सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों के समायोजन को रद्द किया और साथ ही ये आदेश दिया गया कि, उनको तत्काल में ना हटाया जाए। इसके साथ ही ये भी कहा गया कि, शिक्षामित्रों को दो चरण में टीईटी की परीक्षा पास करनी होगी।

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