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क्या है रंगोली बनाने के पीछे की कहानी, जानिए


रंगोली में बने स्वस्तिक, कमल का फूल, लक्ष्मी जी के पदचिह्न देख कर मन प्रफुल्लित होता है, इसीलिए घरों, देवालयों में खास मौकों पर रंगोली बनाई जाती है। घर की महिलाएं बडे़ ही प्रेम के साथ रंगोली बनाती हैं।

दिवाली के पर्व पर अनेक घरों में रंगोली बनाई जाती है क्योंकि रंगोली से घर की सुंदरता में चार चांद लग जाता है। इसे त्योहार, व्रत, पूजा, उत्सव, विवाह आदि शुभ अवसरों पर सूखे और प्राकृतिक रंगों से बनाया जाता है। इसमें साधारण चित्र और आकृतियां हो सकती हैं या फिर देवी-देवताओं की आकृतियां। रंगोली में बने स्वस्तिक, कमल का फूल, लक्ष्मी जी के पदचिह्न देख कर मन प्रफुल्लित होता है, इसीलिए घरों, देवालयों में खास मौकों पर रंगोली बनाई जाती है। घर की महिलाएं बडे़ ही प्रेम के साथ रंगोली बनाती हैं।

आइए आपको बताते हैं कि घर में रंगोली बनाना क्यों आवश्यक होता है।

क्या है रंगोली बनाने के पिछे की कहानी, जानिए




कहा जाता है कि एक बार शंकर जी हिमालय के दर्शन के लिए जा रहे थे। जाते समय उन्होने पार्वती जी से कहा- जब मैं घर वापस लौटूं तो मुझे घर और आंगन मन को प्रसन्न करने वाला मिलना चाहिए। अगर ऐसा ना हुआ तो मैं दोबारा हिमालय लौट जाऊंगा। यह सुन कर माता पार्वती घबरा गई, इतना कहते ही शंकर जी हिमालय के लिए चल पड़े। पार्वती जी ने घर में साफ-सफाई की और उसे स्वच्छ-सुंदर बनाने के लिए पूरा आंगन गोबर से लीपा। घर अभी पूरी तरह से सूखा भी नहीं था कि शंकर भगवान के आने की सूचना उनके पास पहुंची। पार्वती जी फूल हाथ में लिए उनके स्वागत के लिए जल्दी-जल्दी चलने के कारण वहीं फिसल के गिर गईं और उनके महावर लगे पैरों की सुंदर आकृति की छाप गीली भूमी पर बन गई। लाल रंग के महावर पर गिरे फूलों ने वहां एक सुंदर आकृति बना दी। तभी भगवान शंकर वहां आ पहुंचे और उसे देख कर मंत्रमुग्ध हो उठे। बड़ी प्रसन्नता से उन्होंने कहा कि जिन-जिन घरों में रंगोली से सुंदरता उत्पन्न होगी, वहां-वहां मेरा वास रहेगा और हर प्रकार की समृद्धि वहां हमेशा विराजमान रहेगी।


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