कुंभ में आए कल्पवासी कौन हैं और सन्यासी से अलग क्या है इनकी दिनचर्या ?

कुंभ 2019 की शुरुआत हो चुकी है और बहुत ही ज्यादा तादाद में लोग शाही स्नान करने प्रयागराज पहुंच रहे हैं। 15 जनवरी से शुरु होकर 4 मार्च तक चलने वाले कुंभ में करोड़ों लोग अपने पापों का प्रायश्चित करने कुंभ मेले में आते हैं। इसबार का कुंभ काफी ज्यादा अलग है क्योंकि इसबार ना सिर्फ भव्य तरीके से इसका आयोजन हो रहा है बल्कि श्रद्धालुओं को बहुत कुछ नया भी देखने को मिलेगा। इसबार अलग-अलग अखाड़ों के साथ ही कल्पवासियों की भी काफी ज्यादा तादाद कुंभ में देखने को मिल रही है। अब लोगों के दीमाग में ये बात आएगी कि आखिर कल्पवासी कौन होते हैं ?



तो हम आज कल्पवासी के बारे में सारी जानकारी आपको देने वाले हैं। जिस तरह से कुंभ में नागा साधुओं की एक अलग दुनिया होती है ठीक उसी प्रकार कल्पवासी भी अपनी एक अलग दुनिया बसाकर कुंभ में मौजूद रहते हैं। कुंभ में जितने साधुओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है उसी तरह से कल्पवासी भी लाखों की संख्या में आकर संगम के पवित्र धरती पर भगवान की पूजा अर्चना कर रहे हैं। अपने गृहस्थ जीवन से आने वाले ये सारे कल्पवासी अन्य साधुओं से अलग होते हैं और ये दिन में तीन बार नहाते हैं और सिर्फ एकबार ही खाना खाता हैं। बाकी के समय वो भगवान की आस्था में लीन रहते हैं।

कल्पवासियों की दिनचर्या अन्य साधुओं से अलग होती है और उनके सारे काम करने का एक निर्धारित समय होता है। रात तीन बजे सोकर उठने के बाद वो भगवान की पूजी अर्चना में लग जाते हैं। इतना ही नहीं जो कल्पवासी होते हैं वो सिर्फ भूमि पर सोते हैं। कल्पवासी जब भोजन करने बैठते हैं तो उससे पहले वो या तो दान करेंगे नहीं तो अपने गुरू या किसी अन्य सन्यासी को भोजन कराएंगे और साथ ही उनको गांगाजल का पाना भी करना होता है।

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