आखिर क्यों छाया है मुंबई का जिन्ना हाउस सुखिर्यों में? आइए जानते हैं जिन्ना हाउस विवाद

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संघर्ष के बाद कोर्ट ने नुस्ली वाडिया को दी मां की जगह याचिकाकर्ता बनने की अनुमति

नई दिल्ली:जस्टिस रंजीत मोरे और जस्टिस अनुजा प्रभुदेसाई की खंडपीठ ने नुस्ली वाडिया की याचिका को स्वीकार कर लिया. इस याचिका में उन्होंने कहा था कि पिछले साल उनकी मां की मृत्यु के बाद अब उनको इस मामले में याचिकाकर्ता बनने की अनुमति दी जाए.कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील अद्वैत सेठना द्वारा नुस्ली की अर्जी का विरोध किया गया था।जैसा की हम जानते है कि जिन्ना की बेटी और नुस्ली की मां दीना वाडिया का पिछले वर्ष निधन हो गया था। उन्होंने दक्षिण मुंबई में मालाबार हिल पर बने भव्य जिन्ना हाउस के मालिकाना हक को लेकर अगस्त 2007 में अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वह ही मुहम्मद अली जिन्ना की एकमात्र कानूनी वारिस हैं और इस कारण जिन्ना हाउस पर उनका हक है। जिन्ना हाउस को लेकर दीना वाडिया और केंद्र सरकार के बीच लम्बे समय से कानूनी लड़ाई जारी है।

लंबे वक्त से चल रहा है मुकदमा

जिन्ना हाउस मुंबई के पॉश इलाके में 2.5 एकड़ में फैला हुआ है.बंटवारे के बाद 1949 में सरकार ने एक कानून बनाया था जिसके तहत उन सभी संपत्तियों को सरकार ने आपने अधिकार में लिया था जो लोग भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे. जिन्ना हाउस लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का विषय बना हुआ है. सरकार ने इसे ‘निष्क्रांत संपत्ति’ घोषित किया हुआ है,सरकार का कहना है कि जिन्ना ने ये प्रॉपर्टी अपनी बहन फातिमा के नाम 30 मई 1939 को कर दी थी. हालांकि दीना और उनके वकील इस बात से इनकार करते रहे थे |

यही नहीं जिन्ना हाउस लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के बीच भी विवाद का विषय बना हुआ है. पाकिस्तान मांग कर रहा है कि मुम्बई में उसे अपना वाणिज्य दूतावास बनाने के लिए यह भवन उसे सौंप दिया जाए. फ़िलहाल उसका रखरखाव राज्य लोक निर्माण विभाग के हवाले कर दिया गया.इसको गिराये जाने की मांग के अलावा जिन्ना हाउस की मिल्कियत पर कई और लोगों के दावे भी सामने आते रहे हैं.

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