ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने कहा ,अमेरिका ईस्लामिक देशो पर “मनोवैज्ञनिक” दबाव बनाना रहा

अंतरराष्ट्रीय राजनीति

नई दिल्ली: अमेरिका ने मंगलवार सुबह साढ़े नौ बजे से ईरान के के ऑटोमोबाइल सेक्टर के साथ-साथ उसके सोने और किमती धातुओ के व्यापार पर भी प्रतिबन्ध लगा गया।

ट्रंप को उम्मीद है कि आर्थिक दबाव में आकर ईरान नए समझौते करने के लिए तैयार हो जाएगा, और अपनी नुकसानदेह गतिविधिया रोक देगा।

ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने ईरान के लोगो को संबोधित करते हुए कहा कि, ” हम कूटनीति और बातचीत के हमेशा पक्षधर रहे है। लेकिन बातचीत के लिए ईमानदारी की जरुरत होती है.” साथ मे रुहानी ने यह भी कहा कि अमेरिका ईस्लामिक देशो पर “मनोवैज्ञनिक” दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।

2015 में हुए समझौते में शामिल रहे रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने अमरीका के इस क़दम पर ‘गहरा अफ़सोस’ जताया है.
उन्होंने समझौते के तहत ईरान से किए गए वादों को निभाने की प्रतिबद्धता जताई है. ईरान ने कहा है कि अगर उसे आर्थिक लाभ मिलते रहेंगा तो वह भी अपने वादों को निभाता रहेगा।

 

ट्रंप ने ट्वीट कर कहा

ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि ‘ईरान पर लगे प्रतिबंध आधिकारिक तौर पर लागू हो गए हैं। यह अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध हैं और नवंबर में यह अगले स्तर तक जाएंगे। ईरान के साथ जो भी व्यापार करेगा वह अमेरिका के साथ व्यापार नहीं कर सकेगा। मैं सिर्फ दुनिया के लिए शांति मांग रहा हूं, उससे कम नहीं!’


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बता दे कि भारत चीन के बाद सबसे ज्यादा तेल लेने वाला देश है जिसको इस प्रतिबन्ध से काफी नुकासान होने की सम्भावना है। कुछ जानकारो का मानना है कि भारत को तत्काल कोई प्रभाव नही पड़ेगा, लेकिन 4 नवम्बर को लगने वाले प्रतिबंधो से भारत पर प्रभाव पड़ेगा।

BY

PRAMOD YADAV

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